6महीने बाद भी नहीं लगी शहीद हेमू कालाणी की मूर्ति:सिंधी समाज नाराज, ठेकेदार पर काम छोड़ने का आरोप

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रायपुर के शहीद हेमू कालाणी चौक पर प्रस्तावित प्रतिमा स्थापना और सौंदर्यीकरण का काम छह महीने बाद भी शुरू नहीं होने पर सिंधी समाज ने नाराजगी जताई है। समाज का आरोप है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक पुरंदर मिश्रा की मौजूदगी में भूमिपूजन होने और 10 लाख रुपए की राशि स्वीकृत होने के बावजूद अब तक न प्रतिमा स्थापित हुई और न ही चौक के सौंदर्यीकरण का काम शुरू हो सका। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि जिस ठेकेदार को निर्माण कार्य का टेंडर मिला था, वह छत्तीसगढ़ छोड़कर चला गया है। निगम अधिकारियों और समाज के प्रतिनिधियों के फोन भी नहीं उठा रहा है। ऐसे में निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सिंधी समाज ने निगम आयुक्त से की जल्द निर्माण की मांग सिंधी काउंसिल ऑफ इंडिया, छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश अध्यक्ष ललित जैसिंघ ने कहा कि भूमिपूजन के कई महीने बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
उन्हें जानकारी मिली है कि टेंडर निरस्त होने की स्थिति में है। इसे लेकर सिंधी काउंसिल की ओर से नगर निगम आयुक्त को पत्र भी भेजा गया है। उन्होंने मांग की कि प्रतिमा स्थापना और चौक का सौंदर्यीकरण जल्द पूरा कराया जाए। वहीं, शहीद हेमू कालाणी समिति के अध्यक्ष किशोर आहूजा ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के लिए 10 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे। निर्माण सामग्री भी मौके पर पहुंच गई थी, लेकिन इसके बाद भी काम शुरू नहीं हुआ। उनका आरोप है कि ठेकेदार काम छोड़कर चला गया और अब किसी का फोन भी नहीं उठा रहा है। निगम ने ठेकेदार को तीन नोटिस दिए नगर निगम के एमआईसी सदस्य अमर गिदवानी ने माना कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण काम रुका हुआ है। उन्होंने बताया कि निगम की ओर से ठेकेदार को अब तक तीन नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उसे दो दिन का अंतिम समय दिया गया है। यदि इसके बाद भी काम शुरू नहीं होता है तो टेंडर निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गिदवानी ने कहा कि सिंधी समाज की नाराजगी जायज है और नगर निगम जल्द से जल्द प्रतिमा स्थापना और सौंदर्यीकरण का काम पूरा करने की कोशिश कर रहा है। क्या है पूरा मामला? शहीद हेमू कालाणी चौक के सौंदर्यीकरण और प्रतिमा स्थापना का भूमिपूजन करीब छह महीने पहले सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक पुरंदर मिश्रा ने किया था। परियोजना के लिए 10 लाख रुपए की राशि भी स्वीकृत की गई थी, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। इससे सिंधी समाज में नाराजगी बढ़ गई है और समाज ने नगर निगम से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
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