डेढ़ मीटर दूर फटा आईईडी, चेहरा-आंखें जख्मी हुई, फिर भी नहीं डिगे डॉ. प्रशांत

भास्कर न्यूज | कवर्धा कभी पशुओं की जिंदगी बचाने वाले डॉक्टर के हाथों में जब पुलिस की कमान आई तो वही हाथ बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन का नेतृत्व करने लगे। कबीरधाम में हाल ही में डीएसपी (अजाक) के पद पर पदस्थ डॉ. प्रशांत देवांगन को उनकी वीरता के लिए पुलिस वीरता पदक दिया जाएगा। वीरता पदक के लिए शुक्रवार को छत्तीसगढ़ प्रदेश के 141 पुलिसकर्मियों की सूची जारी की गई है। सूची में उप पुलिस अधीक्षक डॉ. प्रशांत का नाम भी शामिल है। आगामी गणतंत्र दिवस समारोह 2027 में उन्हें यह सम्मान मिलेगा। डीएसपी डॉ. प्रशांत की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि नक्सल मोर्चे पर एक ऑपरेशन के दौरान वे खुद आईईडी ब्लास्ट की चपेट में आ गए थे। घटना 20 मार्च 2025 की रात नारायणपुर के गवाड़ी जंगल में हुई। दंतेवाड़ा-नारायणपुर के 800- 900 जवान ज्वाइंट ऑपरेशन के तहत गश्त पर निकले थे। प्रेशर आईईडी डॉ. प्रशांत से महज डेढ़ मीटर की दूरी पर फट गया। विस्फोट में उनके चेहरे, आंखों और छाती में गंभीर चोटें आईं। वे घायल हुए पर मोर्चे पर डटे रहे। पांच साल पशु डॉक्टर रहे फिर चुनी पुलिस की जॉब डॉ. प्रशांत देवांगन ने पुलिस सेवा में आने से पहले करीब पांच साल तक पशु चिकित्सा अधिकारी के रूप में काम किया। अगस्त 2020 में उन्होंने राज्य पुलिस सेवा ज्वाइन की। उनकी पोस्टिंग नक्सल प्रभावित नारायणपुर, सुकमा क्षेत्र में हुई। डीआरजी में जिम्मेदारी मिलने के बाद कई कठिन एंटी-नक्सल ऑपरेशनों में टीम का नेतृत्व किया।
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