बस्तर में पहली बार ब्रेन की DSA जांच:पैरालिसिस मरीज के इलाज में मिली बड़ी सफलता, डॉक्टर बोले- कैथलैब शुरू होने का मिला फायदा

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बस्तर के डिमरापाल स्थित कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (CCSH) में पहली बार ब्रेन की डिजिटल सब्सट्रैक्ट एंजियोग्राफी (DSA) सफलतापूर्वक की गई। इस जांच की मदद से पैरालिसिस से पीड़ित महिला मरीज के मस्तिष्क की नसों की वास्तविक स्थिति का पता लगाया गया। जिससे उसके इलाज को नई दिशा मिली है। जानकारी के अनुसार, बस्तर ब्लॉक के बड़े आलनार निवासी सुमित्रा नेताम को पैरालिसिस की शिकायत के बाद सीसीएसएच में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्थिति का आकलन करने के बाद ब्रेन की DSA जांच करने का निर्णय लिया। अस्पताल के नवनिर्मित कैथलैब में यह जांच सफलतापूर्वक संपन्न की गई। इस प्रक्रिया को हैदराबाद के कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. ऋषिकेश सरकार और सीसीएसएच के न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। वहीं क्रिटिकल केयर कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. सौरभ कुमार सहित अन्य चिकित्सकों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पहले निजी अस्पताल लेकर गए, तबियत बिगड़ी तो लाए CCSH परिजनों के मुताबिक, सुमित्रा नेताम को नियमित जांच के लिए जगदलपुर के एक निजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां अचानक उन्हें पैरालिसिस का अटैक आ गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल सीसीएसएच में भर्ती कराया गया। न्यूरोसर्जन डॉ. पवन बृज ने बताया कि, मरीज की डिकम्प्रेसिव क्रेनियोटॉमी और अन्य आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाएं की गई हैं। उन्होंने कहा कि ब्रेन की DSA जैसी जटिल जांच पहले बस्तर में उपलब्ध नहीं थी, लेकिन सीसीएसएच में कैथलैब शुरू होने के बाद अब इस तरह की अत्याधुनिक जांच और उपचार स्थानीय स्तर पर संभव हो गया है। जांच के बाद बीमारी के सटीक कारणों का चला पता डॉक्टरों के अनुसार DSA जांच के बाद बीमारी के वास्तविक कारणों की सटीक पहचान हुई, जिसके आधार पर इलाज किया जा रहा है। फिलहाल मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है और वह चिकित्सकीय निगरानी में है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बस्तर में पहली बार हुई इस जांच से गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मरीजों को अब बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा और उन्हें क्षेत्र में ही उपचार सुविधाएं मिल सकेंगी।
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