20 एकड़ पट्टे की जमीन की अवैध बिक्री पर एक्शन:राजनांदगांव कलेक्टर कोर्ट ने 9 पट्टे किए रद्द, जमीन फिर सरकार के नाम दर्ज

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राजनांदगांव कलेक्टर न्यायालय ने शासकीय पट्टे की जमीन को बिना अनुमति बेचने के मामले में अहम फैसला सुनाया है। घुमका तहसील के ग्राम डुडिया में करीब 7.826 हेक्टेयर यानी 20 एकड़ शासकीय पट्टे की भूमि के संबंध में जारी 9 पट्टे रद्द कर दिए गए हैं। न्यायालय ने जमीन को दोबारा 1981-82 से पहले की स्थिति में शासकीय घास भूमि (चराई) के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। कलेक्टर जितेंद्र यादव के मुताबिक, करीब 1970 के आसपास सरकार ने गरीब और जरूरतमंद किसानों को खेती के लिए शासकीय पट्टे दिए थे। भू-राजस्व संहिता के तहत ऐसी जमीन को सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना किसी अन्य व्यक्ति को बेचा नहीं जा सकता। ग्रामीणों की शिकायत पर शुरू हुई जांच ग्राम डुडिया के ग्रामीणों ने करीब 20 एकड़ शासकीय पट्टे की जमीन को बिना अनुमति बेचे जाने की शिकायत की थी। इसके बाद कलेक्टर न्यायालय ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार से मामले की जांच रिपोर्ट मंगाई। सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया गया और जमीन की बिक्री से जुड़े दस्तावेज पेश करने को कहा गया। हालांकि, कोई भी पक्ष सक्षम अधिकारी की अनुमति से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। LRC की धाराओं का उल्लंघन मिला न्यायालय ने बिना अनुमति शासकीय पट्टे की जमीन का हस्तांतरण किए जाने को छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 158(3) और धारा 165(7ख) उपधारा (1) का उल्लंघन माना। इसके आधार पर पट्टाधारी उमाबाई और अन्य 8 लोगों को जारी पट्टे निरस्त कर दिए गए। मामले में प्रभावित खसरा नंबर 353/9, 282/2, 279/2, 281/1, 282/4, 281/2, 353/2, 353/3, 353/5, 353/6, 353/7 और 353/8 हैं। इन सभी जमीनों को फिर से शासन के नाम दर्ज कर लिया गया है। अब जनहित के काम में आएगी जमीन कलेक्टर जितेंद्र यादव ने बताया कि वापस ली गई शासकीय भूमि का उपयोग सार्वजनिक और सरकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। ग्रामीणों ने यहां वृक्षारोपण और खेल मैदान विकसित करने की इच्छा जताई है। इसके अलावा पंचायत, वृक्षारोपण और अन्य शासकीय योजनाओं के तहत भी इस जमीन का उपयोग जनहित के कार्यों में किया जा सकता है।
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