खाद संकट: किसान लगा रहे सोसायटी के चक्कर

भास्कर न्यूज | नरियरा खरीफ सीजन के अहम दौर में नरियरा नगर पंचायत और आसपास के गांवों के किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। डीएपी, सल्फर और पोटाश की अनियमित उपलब्धता के कारण किसानों को बार-बार सेवा सहकारी समिति के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि फसल बचाने के लिए वे 10 से 12 दिन तक रोज सोसायटी पहुंच रहे हैं, लेकिन कई बार खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार खाद वितरण की प्रक्रिया ऑनलाइन होने से कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। समिति में ऑपरेटर के नहीं रहने से टोकन जारी करने, बायोमेट्रिक सत्यापन और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं प्रभावित हो रही हैं। सुबह से लाइन में खड़े किसानों को शाम तक इंतजार करना पड़ता है। इनमें बुजुर्ग और महिलाएं भी शामिल हैं। शिकायत करने पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। डीएपी की कमी के बीच प्रशासन किसानों को एनपीके के उपयोग की सलाह दे रहा है। किसानों का कहना है कि एनपीके डीएपी का विकल्प नहीं है और इससे खेती की लागत बढ़ रही है। किसानों के मुताबिक डीएपी की सरकारी कीमत करीब 1350 रुपए प्रति बोरी है, जबकि बाजार में यह 2000 से 2500 रुपए तक मिल रही है। वहीं एनपीके और यूरिया के दाम भी खुले बाजार में अधिक हैं। किसानों ने बताया कि खाद की कमी के कारण प्रति एकड़ खेती की लागत करीब 5200 रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा समिति परिसर में पेयजल, शेड, बैठने की व्यवस्था और पार्किंग सुविधा नहीं होने से भी परेशानी हो रही है। समिति प्रबंधन गोदाम की सीमित क्षमता का हवाला देकर चरणबद्ध वितरण की बात कह रहा है। वहीं किसान खरीफ सीजन को देखते हुए तत्काल व्यवस्था सुधारने की मांग कर रहे हैं। किसानों ने समाधान नहीं होने पर आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और चक्काजाम की चेतावनी दी है। मांग उठाने वालों में जयप्रकाश राठौर, रविन्द्र साहू, मेवालाल कोटवार, शिवकुमार राठौर, वीरेंद्र कुमार बरेठ, संतोष निर्मलकर नेगी सहित बड़ी संख्या में किसान शामिल हैं।
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