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Police Stations Must Maintain 18-Month CCTV Footage


बिलासपुर17 मिनट पहले

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सीसीटीवी फुटेज के अभाव में आरोप साबित नहीं कर सके याचिकाकर्ता आरोपी। - Dainik Bhaskar

सीसीटीवी फुटेज के अभाव में आरोप साबित नहीं कर सके याचिकाकर्ता आरोपी।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बैंच ने कहा कि थानों में केवल कैमरे लगाना पर्याप्त नहीं है। सीसीटीवी सिस्टम हर समय चालू रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम से कम 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों को सीसीटीवी व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करने के साथ पर्याप्त स्टोरेज और पावर बैकअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रशासनिक या तकनीकी लापरवाही के कारण इलेक्ट्रॉनिक सबूत नष्ट नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाए।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम से कम 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखना जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार कम से कम 18 महीने तक फुटेज सुरक्षित रखना जरूरी है।

जानिए क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, जीपीएम के गौरेला थाने में दर्ज NDPS मामले के आरोपी बनवारी लाल गुप्ता समेत चार आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। आरोपियों का दावा था कि कथित घटना से एक दिन पहले ही पुलिस ने उन्हें थाने में बैठा लिया था। अपने दावे की पुष्टि के लिए उन्होंने 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच की थाने की सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल सीडीआर और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की मांग की थी।

पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।

पुलिस थानों में लगे CCTV कैमरों की कार्यप्रणाली और रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को लेकर सख्त निर्देश दिए हैं।

आरोपियों की याचिका खारिज

ट्रायल कोर्ट में पुलिस ने बताया कि 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी होने के कारण संबंधित सीसीटीवी फुटेज सिस्टम से ऑटोमेटिक डिलीट हो चुकी है। रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि जब फुटेज उपलब्ध ही नहीं है, तो उसे पेश करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसके साथ ही कोर्ट ने आरोपियों की याचिका खारिज कर दी।

हाईकोर्ट ने इससे नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा होती है।

हाईकोर्ट ने इससे नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा होती है।

हाईकोर्ट ने कहा- पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का उद्देश्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। साथ ही इससे नागरिकों के अधिकारों की भी रक्षा होती है।

वहीं, राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश के 550 थानों में सीसीटीवी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए 102.10 करोड़ रुपए की परियोजना पर काम चल रहा है। जिला स्तरीय निगरानी समितियां हर महीने थानों के सीसीटीवी सिस्टम की जांच करेंगी। साथ ही, 18 महीने की रिकॉर्डिंग का बैकअप सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित कर इसकी रिपोर्ट देंगी।

हाईकोर्ट ने आदेश की कॉपी मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

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प्रदेश में फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर जनहित याचिका पर हुई सुनवाई।,

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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने 124 करोड़ रुपए की लागत से फायर बिग्रेड गाड़ियों और उपकरणों की खरीदी में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होगी। पढ़ें पूरी खबर…

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