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कोकड़ी तराई जलाशय के कैचमेंट पर कब्जा और प्लॉटिंग का खेल, 120 से ज्यादा लोगों को नोटिस

कोकड़ी तराई जलाशय के कैचमेंट पर कब्जा और प्लॉटिंग का सिलसिला थम नहीं रहा है। जलाशय के लिए 48 साल पहले अधिग्रहित जमीन के बड़े हिस्से में अब मकान तन गए हैं। मौके पर पड़ताल के दौरान 10 एकड़ से ज्यादा हिस्से में मकान और प्लॉट मिले हैं। कई जगह घर बन चुके हैं, तो कुछ हिस्सों में निर्माण जारी है। जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर बेचने की बात भी सामने आई है। एक डिसमिल जमीन का सौदा 2 लाख रुपए तक किया जा रहा है।

यह सामान्य निजी जमीन की खरीद-बिक्री नहीं, बल्कि उस क्षेत्र की जमीन है, जिसे जलाशय के लिए सरकार पहले ही अधिग्रहित कर चुकी है। दस्तावेजों के मुताबिक 1978 में कोकड़ीतराई, चिराईपानी, उच्चभिट्ठी और परसदा गांव के 108 किसानों से 72.455 हेक्टेयर जमीन ली गई थी। पर अधिग्रहित जमीन के ज्यादातर खसरे अब तक जल संसाधन विभाग के नाम दर्ज नहीं हो सके हैं। रिकॉर्ड में विभाग का नाम नहीं चढ़ा, लेकिन मौके पर कॉलोनी बन गई है।

मौके पर कई हिस्सों में जमीन को छोटे टुकड़ों में बांटा गया है। कुछ जगह मकान पूरी तरह तैयार हैं, जबकि कुछ जगह नींव और निर्माण का काम चल रहा है। आसपास रहने वाले लोगों के मुताबिक पिछले कुछ समय में यहां निर्माण तेजी से बढ़ा है। जमीन खरीदने वालों को छोटे रकबे में प्लॉट उपलब्ध कराए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर एक डिसमिल जमीन की कीमत 2 लाख रुपए तक बताई जा रही है।

कोकड़ी तराई जलाशय केवल पुराना निर्माण नहीं है। इससे आज भी आसपास के खेतों में सिंचाई होती है। उच्चभिट्ठी के अलावा कीरीतमाल, चारभाठा, पंडरीपानी और आसपास के गांवों के खेतों तक जलाशय का पानी पहुंचता है। बारिश के बाद गर्मी के पूरे सीजन में किसान सिंचाई के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इसलिए कैचमेंट और डूब क्षेत्र में बढ़ता निर्माण केवल जमीन के रिकॉर्ड का मामला नहीं है।

डैम की जमीन पर कब्जे की रिपोर्ट तैयार कर सौंप दी गई है। 120 से ज्यादा लोगों को नोटिस भी दिया गया है। इसके बाद मामला तहसील स्तर पर चल रहा है। आगे की कार्रवाई वहीं से होगी।

जल संसाधन विभाग के ईई होमेश नायक ने कहा कि यह सही है कि डैम क्षेत्र में कब्जा हुआ है।

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