छत्तीसगढ़ बना देश का पहला राज्य: स्कूली शिक्षा में AI को शामिल करने की रणनीति पर रायपुर में कॉन्क्लेव, लइका चिन्हारी ऐप लॉन्च


सरकारी स्कूलों में पढ़ाई के तरीके में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की तैयारी है। रायपुर के पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित देश के पहले राज्य स्तरीय AI कॉन्क्लेव में इसके लिए रणनीति पर मंथन हुआ। इसमें स्पष्ट किया गया कि AI शिक्षक की जगह नहीं लेगा, बल्कि सहायक के रूप में हर बच्चे की कमजोरी और लर्निंग गैप पहचानकर फीडबैक देगा। दावा है कि विद्यालयीन शिक्षा में AI के प्रभावी और व्यापक इस्तेमाल की रणनीति बनाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है।
विशेषज्ञों ने बताया कि पारंपरिक मास डिजिटल कंटेंट और ई-लाइब्रेरी का फायदा केवल 10% टॉप छात्र ही उठा पाते हैं। पिछले 10 वर्षों में बच्चों के बीच लर्निंग गैप बढ़ा है। हर बच्चे की सीखने की गति, तरीका और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि अलग होती है। AI आधारित पर्सनलाइजेशन सिस्टम इसी अंतर की पहचान करेगा, ताकि बच्चे की जरूरत के अनुसार पढ़ाई कराई जा सके।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने शाला त्यागी बच्चों को चिह्नित कर दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए लइका चिन्हारी ऐप का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि कॉन्क्लेव के निष्कर्ष शिक्षकों के लिए सशक्त सहायक का काम करेंगे। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. कमलजीत सिंह और समग्र शिक्षा आयुक्त डॉ. किरण कौशल ने बताया कि AI से स्मार्ट क्लास और ICT लैब को अधिक सुगम बनाया जाएगा। बता दें कि इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के सभी 5 संभागों से शिक्षक आए थे।
कॉन्क्लेव में AI से कॉपी जांच के मुद्दे पर चर्चा हुई। एक शिक्षक ने पूछा कि बच्चा यदि कुछ लिखता है तो क्या AI उसे पकड़ पाएगा? विशेषज्ञ ने जवाब दिया कि यह प्रोडक्ट लाइव है और 55 लाख बच्चे इससे जुड़े हैं। यह टेस्टिंग लेवल से आगे निकल चुका है। बदलाव होने पर इसमें तत्काल सुधार किया जाता है। AI को फ्री छोड़ने के बजाय फिल्टर करके इस्तेमाल करने पर अच्छे परिणाम मिलते हैं।
एक अन्य शिक्षक ने कहा कि बच्चों का कहना है कि लिखित कॉपियों की कड़ी चेकिंग के कारण नंबर कम आए। क्या कॉपियां AI से जांची गई थीं? इस पर विशेषज्ञ ने स्पष्ट किया कि CBSE परीक्षा में कॉपियां AI ने नहीं जांची थीं। वहां ऑन-स्क्रीन चेकिंग हुई थी। सिस्टम में पहले 10 से 20 हजार कॉपियां शिक्षकों से जांच कराई गईं। फिर AI से जांच कराकर उसे फाइन ट्यून किया गया कि परिणाम शिक्षक की जांच से मैच कर सकें। इसके बाद यह AI टूल विकसित किया गया।
कॉन्क्लेव में बताया गया कि पढ़ाई का नया मॉडल 3 लेयर में काम करेगा। इसका उद्देश्य शिक्षकों को सशक्त बनाना और हर बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा सुनिश्चित करना है।




