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Bemetara IOB Bank Scam | Manager Vineet Das Arrested in Tamil Nadu


फर्जी दस्तावेजों और नियमों के उल्लंघन से बैंक को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने का आरोप

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) की शाखा में हुए 14.56 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को तमिलनाडु के तंजावुर से गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमां

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पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई लंबे समय तक चली तकनीकी निगरानी और वित्तीय जांच के बाद की गई। अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और घोटाले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

मामले में चार बिचौलियों की पहले ही हो चुकी है

मामले में चार बिचौलियों की पहले ही हो चुकी है

2022 में दर्ज हुआ था मामला

मामले की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी, जब इंडियन ओवरसीज बैंक की बेमेतरा शाखा के तत्कालीन प्रबंधक रज्जू पाटनवार ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन शाखा प्रबंधक विनीत दास ने बैंकिंग नियमों का उल्लंघन करते हुए करोड़ों रुपये के ऋण स्वीकृत किए और बैंक को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।

रायपुर स्थित बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय की आंतरिक जांच में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 409, 120-बी और 34 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

आईजी और एसपी की मॉनिटरिंग में हुई गिरफ्तारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अभिषेक शांडिल्य की सतत मॉनिटरिंग और बेमेतरा पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई।

सिटी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक सोनल ग्वाला के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और लगातार निगरानी के आधार पर आरोपी का पता लगाया। इसके बाद 29 जुलाई 2026 को तमिलनाडु के तंजावुर से विनीत दास को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर बेमेतरा लाया गया।

180 लोन खातों की जांच में सामने आईं बड़ी अनियमितताएं

पुलिस के अनुसार, बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट में 180 ऋण खातों की जांच की गई। जांच में लगभग 16.01 करोड़ रुपये के ऋण वितरण में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, जिनमें से 14.56 करोड़ रुपये को बैंक के वित्तीय नुकसान के रूप में चिन्हित किया गया है।

जांच में सामने आया कि कई मामलों में बैंकिंग प्रक्रिया और ऋण स्वीकृति के नियमों का गंभीर उल्लंघन किया गया।

180 लोन खातों में 16 करोड़ से ज्यादा के लेन-देन की जांच

180 लोन खातों में 16 करोड़ से ज्यादा के लेन-देन की जांच

जांच में सामने आए प्रमुख आरोप

  • कई ऐसे संस्थानों के नाम पर ऋण स्वीकृत किए गए, जो अस्तित्व में ही नहीं थे या पहले से बंद थे।
  • स्वयं सहायता समूह (SHG) को निर्धारित सीमा से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए।
  • खाताधारकों की जानकारी और हस्ताक्षर के बिना खातों के बीच राशि ट्रांसफर कर नकद निकासी की गई।
  • कृषि यंत्रीकरण के नाम पर ऋण स्वीकृत कर राशि डीलरों के खातों में भेजी गई, जबकि मौके पर मशीनें या संबंधित संपत्ति नहीं मिली।
  • कई सप्लायरों के जीएसटी नंबर फर्जी पाए गए।
  • पात्रता से अधिक किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण स्वीकृत किए गए।
  • मूल्यांकन रिपोर्ट, कानूनी राय और अन्य अनिवार्य बैंकिंग प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
  • भूमि दस्तावेज और फसल पैटर्न के अनुरूप ऋण स्वीकृत नहीं किए गए।
  • मत्स्य विभाग की योजनाओं में भी कथित अनियमितताएं सामने आईं।
  • कई खातों में पर्याप्त सुरक्षा और पात्रता के बिना करोड़ों रुपये का वित्तपोषण किया गया।
  • ऋण राशि के उपयोग और नकद लेन-देन की प्रभावी निगरानी नहीं की गई।

बिचौलियों के जरिए संचालित हो रहा था नेटवर्क

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कमलेश सिन्हा, जोहन सिंह वर्मा, नागेश कुमार वर्मा और टीकाराम माथुर बैंक और ऋण लेने वालों के बीच बिचौलिये के रूप में सक्रिय थे।

आरोप है कि इनकी मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार कराए गए, अपात्र लोगों को ऋण दिलाया गया और बैंक की प्रक्रियाओं को दरकिनार कर करोड़ों रुपये के ऋण स्वीकृत कराए गए। इन चारों आरोपियों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

पूरे नेटवर्क की जांच जारी

पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी विनीत दास से पूछताछ जारी है। जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे, वास्तविक वित्तीय हेराफेरी कितनी हुई और क्या अन्य बैंक अधिकारियों या कर्मचारियों की भी इसमें भूमिका थी।

पुलिस ने संकेत दिए हैं कि जांच के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।

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छत्तीसगढ़ की दुर्ग पुलिस ने नौकरी और कमीशन का लालच देकर खुलवाए गए म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सात महीनों में 1242 म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई है। पढ़िए पूरी खबर…



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