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अस्पतालों में कंज्यूमेबल्स की मनमानी कीमतें: 11 रुपये का IV सेट 225 रुपये में, 7 रुपये की सिरिंज 60 रुपये में

अस्पताल में इलाज कराना अब आम आदमी के लिए किसी आर्थिक संकट से कम नहीं है। बीमारी के इलाज के दौरान डाक्टर की फीस या कमरे के किराए से ज्यादा भारी बिल उन छोटी-छोटी चीजों का होता है, जिन्हें मेडिकल की भाषा में कंज्यूमेबल्स यानी उपभोग्य सामग्रियां कहा जाता है। चौंकाने वाली बात यह है कि थोक बाजार में जो चीजें बेहद सस्ती मिलती हैं, वही अस्पताल के बिल में मरीजों को कई गुना अधिक दामों पर थमाई जाती हैं।

थोक बाजार में महज 11 रुपये में मिलने वाला आईवी इंफ्यूजन सेट अस्पताल पहुंचते-पहुंचते 225 रुपये के भारी-भरकम दाम पर बिकने लगता है। यही नहीं, 7 रुपये से भी कम कीमत वाली डिस्पोजेबल सिरिंज के लिए मरीजों से करीब 60 रुपये तक वसूले जाते हैं।

पेसमेकर, आंखों के लेंस और दिल के वाल्व जैसी उच्च मूल्य वाली वस्तुओं के मामले में तो स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां अंतिम एमआरपी आयातित कीमत से 10 से 30 गुना तक अधिक होती है। इस मूल्य विकृति के कारण मरीजों को अपनी जेब से बहुत ज्यादा पैसा चुकाना पड़ रहा है।

यह गंभीर मुद्दा पिछले 15 वर्षों से समय-समय पर उठता रहा है, लेकिन महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के प्रमुख द्वारा केंद्र सरकार से इस ‘अनुमेय अंतर’ यानी अनुमत मूल्य के दायरे को कड़े नियमों से बांधने का आग्रह करने के बाद यह बहस फिर तेज हो गई है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण के पिछले आंकड़ों में भी इस बात का खुलासा हुआ था कि कैसे अस्पताल थोक में कौड़ियों के भाव सामान खरीदकर मरीजों से मनमाना पैसा वसूलते हैं।

जिले के शतप्रतिशत निजी अस्पताल भी जैसे ही थोक बाजार से सर्जिकल सामान अस्पताल पहुंचता है, वैसे ही उसके दामों को कई गुणा बढ़ा देते है। जिससे इलाज कराने में अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना मरीज व स्वजन को करना पड़ता है और ज्यादातर मामलों में इलाज का बिल पटाते-पटाते लोगों को आर्थिक रूप से कमर तक टूट जाती है।

अस्पतालों और संस्थानों द्वारा कंज्यूमेबल्स पर अत्यधिक मुनाफा वसूले जाने के मामले बेहद संवेदनशील हैं। मरीजों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली इन जीवन-रक्षक व सहायक सामग्रियों की कीमतों में पारदर्शिता होना बेहद जरूरी है। नियमानुसार इस पर उचित निगरानी और विनियामक प्रावधानों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। भीष्म सिंह देव, एडिशनल ड्रग कंट्रोलर,

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