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जीजीवी श्रवण लाइन: 5000 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंची युवाओं की सेवा पहल

गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय की ‘जीजीवी श्रवण लाइन’ पहल ने उच्च शिक्षा को कक्षा, परीक्षा और डिग्री की सीमाओं से बाहर निकालकर समाज के बीच पहुंचाया है। वर्ष 2023 में शुरू हुई यह पहल अब तक पांच हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों तक पहुंच चुकी है। कानून, पेंशन से लेकर तकनीकी और भावनात्मक सहयोग तक, युवाओं ने बुजुर्गों के लिए संवेदना को सेवा का रूप दिया है।

‘जीजीवी श्रवण लाइन’ का दायरा आज बिलासपुर के 10 से अधिक स्थानीय क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता इसका विद्यार्थी-केंद्रित स्वरूप है। साक्षात्कार के माध्यम से 500 से अधिक विद्यार्थी स्वयंसेवकों का चयन किया गया। विशेषज्ञों ने उन्हें कानून, वित्त, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अभिमुखीकरण दिया।

स्वयंसेवकों को छह सेवा समूहों में बांटा गया है और संकाय सदस्य उनका मार्गदर्शन करते हैं। प्रत्येक शनिवार और रविवार को क्षेत्रीय भ्रमण कर वरिष्ठ नागरिकों से संपर्क किया जाता है। कोनी, जबरकोना, सरकंडा, जरहाभाटा, उसलापुर, कुदुदंड, रेलवे कॉलोनी और मंगला सहित विभिन्न क्षेत्रों में सेवा गतिविधियां संचालित होती हैं।

पेंशन व दस्तावेज, डिजिटल बैंकिंग, स्वास्थ्य और भावनात्मक सहयोग के साथ आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में कंबल वितरण भी किया जाता है। वरिष्ठ नागरिकों को विश्वविद्यालय परिसर से जोड़ने के लिए विशेष भ्रमण और संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

किसी बड़े अभियान की नींव हमेशा बड़ी योजना से नहीं पड़ती। जीजीवी श्रवण लाइन के पीछे भी एक बुजुर्ग की पेंशन संबंधी समस्या में विद्यार्थियों द्वारा की गई मदद थी। वर्ष 2022 का वह अनुभव आगे चलकर संगठित पहल में बदला। 2023 में 14 अप्रैल को इसे औपचारिक रूप मिला। इस तरह एक छोटी मानवीय पहल ने विश्वविद्यालय में युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के बीच नियमित संवाद का रास्ता खोल दिया।

यह पहल विद्यार्थियों को वास्तविक परिस्थितियों में सीखने का अवसर भी देती है। कानून, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, स्वास्थ्य, वित्त और प्रबंधन जैसे विषयों का व्यावहारिक इस्तेमाल सेवा कार्यों में होता है। इसके साथ विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, संवाद-कौशल और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित होने का उल्लेख पहल में किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सामाजिक, नैतिक और मानवीय क्षमताओं के विकास वाली दृष्टि से भी इसे जोड़ा गया है।

कुलपति प्रो. आलोक कुमार चक्रवाल के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस पहल की जिम्मेदारी स्वयंसेवकों के साथ अब समाज कार्य विभाग को दी गई है। समन्वयक प्रो. प्रतिभा जे मिश्रा हैं। सहायक प्राध्यापक मोहिनी गौतम हैं। स्वयंसेवकों के अलावा 232 वालेंटियर्स भी हैं। छात्र-छात्राओं के कामकाज और व्यवहार की बकायदा मॉनिटरिंग की भी व्यवस्था है। इसका लाभ उन्हें विभिन्न परीक्षाओं में भी मिलता है।

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