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90 दिन में चार्जशीट मिलने पर निलंबन खत्म नहीं होगा:हाईकोर्ट ने सिंगल बेंच के आदेश को पलटा, कोरबा के कर्मचारी ने लगाई थी याचिका




छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन अवधि से जुड़े नियमों को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया है, जिसमें 90 दिन बाद जारी एक्सटेंशन आदेश को रद्द कर दिया गया था। हाईकोर्ट ने कहा कि, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण और अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत अगर किसी निलंबित कर्मचारी को 90 दिन के भीतर विभागीय चार्जशीट दे दी गई है, तो निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश जारी न होने मात्र से सस्पेंशन अपने आप खत्म नहीं माना जाएगा। जानिए क्या है पूरा मामला कोरबा कलेक्टोरेट में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 शिवम सहाय चौहान को आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद 25 मार्च 2022 को उन्हें निलंबित कर दिया गया था। कर्मचारी को तय समय सीमा के भीतर 20 अप्रैल 2022 को विभागीय चार्जशीट दे दी गई थी, लेकिन उनके निलंबन को आगे बढ़ाने का आदेश करीब डेढ़ साल बाद 28 अगस्त 2023 को जारी किया गया था। निलंबन आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में लगाई याचिका विभागीय चार्जशीट देने के बाद भी निलंबन आदेश को आगे बढ़ाने के खिलाफ कर्मचारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी, जिसमें डेढ़ साल बाद निलंबन आदेश को नियम विरूद्ध बताया। वहीं, हाईकोर्ट के सिंगल बेंच ने इस देरी को आधार बनाते हुए पूर्व में सिंगल बेंच ने कर्मचारी के निलंबन आदेश और एक्सटेंशन आदेश को रद्द कर बहाली का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य शासन ने डिवीजन बेंच में अपील की थी। हाईकोर्ट ने कहा- निलंबन स्वत: समाप्त होने का प्रावधान लागू नहीं शासन की अपील स्वीकार करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि चूंकि कर्मचारी को 90 दिन के भीतर चार्जशीट मिल गई थी, इसलिए निलंबन स्वतः समाप्त होने का नियम इस मामले में लागू नहीं होता। 90 दिन की समय सीमा को पूर्ण रूप से लागू करने से विभागीय नियमों के प्रावधानों का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। इस आधार पर कर्मचारी की बहाली का पूर्व आदेश निरस्त कर दिया गया। लंबे समय तक निलंबन उचित नहीं हालांकि, डिवीजन बेंच ने यह भी सख्त हिदायत दी है कि विभाग कर्मचारियों को अनिश्चित काल तक निलंबित नहीं रख सकता। सक्षम प्राधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निलंबन को जारी रखने की आवश्यकता की नए सिरे से और निष्पक्ष रूप से समीक्षा करें, ताकि जरूरत न होने पर कर्मचारी को विभागीय कामकाज के लिए किसी गैर संवेदनशील पद पर वापस लिया जा सके।



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