स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों में शिक्षकों का टोटा:सत्र शुरू होने के डेढ़ महीने बाद भी शिक्षक नहीं, बोर्ड-क्लास की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित

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छत्तीसगढ़ में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूलों में शिक्षकों की कमी अब तक दूर नहीं हो पाई है। इस साल शुरू किए गए स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट स्कूल भी शिक्षकों के इंतजार में हैं। कई स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षक नहीं होने से नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, क्योंकि बोर्ड परीक्षाओं का पाठ्यक्रम समय पर पूरा कराना स्कूलों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जिला स्तर की भर्ती रोकी, अब होगी केंद्रीकृत परीक्षा शिक्षकों की रिक्तियां भरने के लिए पहले जिला स्तर पर संविदा भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। कई जिलों ने जून में भर्ती की तैयारी भी कर ली थी, लेकिन बाद में लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला स्तरीय भर्ती प्रक्रिया स्थगित कर दी। अब पूरे प्रदेश में एक साथ केंद्रीकृत भर्ती परीक्षा के माध्यम से शिक्षकों की नियुक्ति करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि भर्ती परीक्षा आयोजित कराने के लिए एजेंसी चयन की प्रक्रिया ही अभी चल रही है। ऐसे में भर्ती में हो रही देरी का सीधा असर स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। एजेंसी चयन के लिए टेंडर जारी, परीक्षा की तारीख तय नहीं लोक शिक्षण संचालनालय ने भर्ती परीक्षा कराने वाली एजेंसी के चयन के लिए जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से टेंडर जारी किया है। एजेंसी तय होने के बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी और फिर परीक्षा आयोजित की जाएगी। फिलहाल विभाग ने परीक्षा की संभावित तारीख को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। यानी शिक्षक भर्ती अभी शुरुआती चरण में ही है। आखिर शिक्षकों की कमी क्यों? शिक्षकों की कमी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। इनमें संविदा पर नियुक्त कई शिक्षकों ने नौकरी छोड़ना। प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ कई शिक्षक वापस अपने मूल विभागों में लौट गए। रिक्त पद भरने की जिला स्तरीय प्रक्रिया बीच में रोक दी गई। नई केंद्रीकृत भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से नियुक्तियां टल गईं। इन वजहों से बड़ी संख्या में पद अब भी खाली हैं। 10वीं-12वीं के विद्यार्थियों की बढ़ी चिंता शिक्षकों की कमी का असर सभी कक्षाओं पर पड़ रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों को हो रही है। गणित, विज्ञान, अंग्रेजी और अन्य विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से कई स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित है। विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों के पास सीमित समय होता है। यदि भर्ती प्रक्रिया में और देरी हुई तो पाठ्यक्रम पूरा कराने और अतिरिक्त कक्षाएं लेने के लिए समय कम पड़ सकता है। स्कूल खुलने से पहले क्यों नहीं हुई तैयारी? उत्कृष्ट स्कूलों की स्थापना का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। ऐसे में नए सत्र से पहले शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए थी। लेकिन पहले जिला स्तर पर भर्ती शुरू करना और फिर उसे रोककर केंद्रीकृत परीक्षा का फैसला लेने से पूरी प्रक्रिया पीछे चली गई। इसका नुकसान अब सीधे विद्यार्थियों को उठाना पड़ रहा है। इस साल शुरू हुए 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट स्कूल प्रदेश में इसी शैक्षणिक सत्र से 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट स्कूल शुरू किए गए हैं। इन स्कूलों में भी रिक्त पदों पर संविदा शिक्षकों की भर्ती केंद्रीकृत परीक्षा के जरिए की जाएगी। रायपुर जिले में देवरी, डब्ल्यूआरएस कॉलोनी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर, मठपुरैना, संजय नगर, सरोरा, पोंड और भंडारपुरी के हायर सेकेंडरी स्कूलों को स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। 700 से ज्यादा उत्कृष्ट स्कूलों में रिक्तियों की चुनौती प्रदेश में वर्तमान में 700 से अधिक स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी और हिंदी माध्यम स्कूल संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 341 पीएम श्री स्कूल भी हैं, जिनमें कुछ स्वामी आत्मानंद स्कूलों को शामिल किया गया है। इन स्कूलों में नियमित शिक्षकों के कई पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाते हैं, जबकि रिक्त पदों पर संविदा नियुक्तियां की जाती हैं। बड़ी संख्या में प्रतिनियुक्ति समाप्त होने और नई भर्ती में देरी के कारण अब अधिकांश उत्कृष्ट स्कूल शिक्षक संकट से जूझ रहे हैं।
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