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निजी यूनिवर्सिटी में मेडिकल-हेल्थ कोर्स की मंजूरी का विरोध:कांग्रेस ने राज्यपाल को लिखा पत्र- विशेषज्ञ समिति बनाकर सभी पक्षों से सुझाव लेने की कही बात




छत्तीसगढ़ में निजी विश्वविद्यालयों को मेडिकल और हेल्थ से जुड़े कोर्स संचालित करने की अनुमति देने के प्रस्ताव का कांग्रेस ने विरोध किया है। कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने राज्यपाल को पत्र भेजकर प्रस्तावित संशोधन को तत्काल रोकने की मांग की है। दरअसल, चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 10 जुलाई 2026 को पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय अधिनियम, 2008 की धारा 6(1) और 6(2) में संशोधन का प्रस्ताव भेजा है। इसके जरिए निजी विश्वविद्यालयों को Health Allied Sciences, Medicine, Nursing, Ayurveda, Homeopathy, Physiotherapy, Dental समेत अन्य स्वास्थ्य संबंधी पाठ्यक्रम संचालित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। कांग्रेस का कहना है कि इस तरह का बदलाव 2008 में बनाए गए स्वास्थ्य विश्वविद्यालय अधिनियम की मूल भावना को प्रभावित करेगा। कांग्रेस का तर्क- मेडिकल शिक्षा का सिस्टम अलग-अलग हो जाएगा डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था का उद्देश्य राज्य में मेडिकल शिक्षा के लिए एक समान शैक्षणिक मानक, परीक्षा व्यवस्था, क्लिनिकल ट्रेनिंग और गुणवत्ता नियंत्रण बनाए रखना है। निजी विश्वविद्यालयों को अलग से मेडिकल और हेल्थ कोर्स संचालित करने की अनुमति मिलने पर अलग-अलग विश्वविद्यालयों की अलग परीक्षा और शैक्षणिक व्यवस्थाएं हो सकती हैं। इससे मेडिकल शिक्षा का पूरा सिस्टम अलग-अलग हिस्सों में बंटने का खतरा है। NMC समेत अलग-अलग नियामकों के नियमों का भी दिया हवाला कांग्रेस ने कहा कि मेडिकल, नर्सिंग, आयुर्वेद, होम्योपैथी, फार्मेसी और डेंटल शिक्षा के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय नियामक संस्थाओं के नियम लागू होते हैं। इनमें नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), NCISM, NCH, Indian Nursing Council और Pharmacy Council of India जैसी संस्थाएं शामिल हैं। ऐसे में राज्य स्तर पर कोई भी बदलाव इन राष्ट्रीय नियमों के अनुरूप होना चाहिए। कांग्रेस ने आशंका जताई कि प्रस्तावित संशोधन से अलग-अलग नियामक व्यवस्थाओं के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। ‘बिना विशेषज्ञों की राय के बदलाव न हो’ डॉ. गुप्ता ने कहा कि इतने बड़े बदलाव से पहले मेडिकल काउंसिल, विश्वविद्यालयों, संबद्ध मेडिकल कॉलेजों, डॉक्टरों और अन्य विशेषज्ञों से राय ली जानी चाहिए। उन्होंने इस मामले में विशेषज्ञ समिति गठित करने, सार्वजनिक सुझाव लेने और Regulatory Impact Assessment कराने की मांग की है। राज्यपाल से 5 मांगें कांग्रेस ने राज्यपाल से प्रस्तावित संशोधन को फिलहाल रोकने की मांग की है। साथ ही कहा है कि— विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाए। सभी संबंधित पक्षों से सुझाव लिए जाएं। मौजूदा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की मूल व्यवस्था को बरकरार रखा जाए। संशोधन से पहले विस्तृत अध्ययन कराया जाए। विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक संशोधन को आगे न बढ़ाया जाए। डॉ. राकेश गुप्ता ने पत्र की प्रतियां मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव और आयुक्त चिकित्सा शिक्षा को भी भेजी हैं।



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