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तिरंगा-यात्रा का दूसरा दिन…बुरकापाल से टेकलगुड़ेम तक शहीदों को नमन:14 को कुर्रेगुट्टा पहाड़ी पर फहराएंगे तिरंगा, आज सुकमा होते हुए पहुंचेंगे बीजापुर




बस्तर में तिरंगा यात्रा का आज दूसरा दिन है। नारायणपुर से 12 अगस्त को शुरू हुई यह यात्रा पहले दिन बारसूर होते हुए दंतेवाड़ा पहुंची। दंतेवाड़ा में रात्रि विश्राम के बाद 13 अगस्त यानी आज सुकमा के लिए रवाना हो गई है। डिप्टी सीएम विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप के नेतृत्व में सैकड़ों बाइकर्स इस यात्रा में शामिल हुए हैं। दूसरे दिन तिरंगा यात्रा सुकमा और दंतेवाड़ा जिले के उन इलाकों से होकर गुजरेगी, जिन्हें कभी नक्सल हिंसा के सबसे बड़े गढ़ों के तौर पर जाना जाता था। यात्रा के दौरान बड़े नक्सली हमलों में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी और शहीद स्थलों से मिट्टी भी संग्रहित की जाएगी। ये होगा रूट दूसरे दिन यात्रा का रूट दंतेवाड़ा से शुरू होकर कुआकोंडा, भूसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, मनीकोंटा, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम होते हुए बीजापुर तक रहेगा।

इस रूट में बुरकापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर और टेकलगुड़ेम जैसे इलाके शामिल हैं। ये वही क्षेत्र हैं, जहां लंबे समय तक नक्सल हिंसा, बड़े हमलों और सुरक्षा अभियानों की वजह से देशभर में चर्चा रही है। सैकड़ों जवानों ने अपनी शहादत दी। अब इन्हीं इलाकों से तिरंगा यात्रा का गुजरना बस्तर में बदलते माहौल की एक अलग तस्वीर पेश करेगा। शहीदों को दी जाएगी श्रद्धांजलि यात्रा के दौरान शहीद जवानों के बलिदान को याद किया जाएगा। जिन स्थानों पर नक्सली हमलों में जवानों ने अपना बलिदान दिया, वहां श्रद्धांजलि देने के साथ मिट्टी भी संग्रहित की जाएगी। इस तरह यात्रा सिर्फ तिरंगा लेकर आगे बढ़ने का कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहीदों की स्मृतियों को संजोने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की कहानी पहुंचाने का संदेश भी देगी। तीसरे दिन कुर्रेगुट्टा पहाड़ी पर फहराएंगे तिरंगा 14 अगस्त को यात्रा का तीसरा और अंतिम दिन होगा। बीजापुर से यात्रा आवापल्ली, उसूर, गलगाम, नंबी और ताड़पाला होते हुए कुर्रेगुट्टा पहाड़ी पहुंचेगी। कभी माओवादियों का गढ़ मानी जाने वाली इस पहाड़ी पर तिरंगा फहराकर यात्रा का समापन किया जाएगा। कुर्रेगुट्टा इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव माना जा रहा है। जिस इलाके की पहचान कभी नक्सल प्रभाव वाले क्षेत्र के रूप में होती थी, उसी पहाड़ी पर तिरंगे का फहराया जाना यात्रा के संदेश को और मजबूत करेगा।



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