इन्दुभवानन्दतीर्थ महाराज बोले-तप से सब कुछ संभव:शंकराचार्य आश्रम में शिव पुराण कथा का आयोजन, महिलाओं को नंदा व्रत करने की सलाह

![]()
बोरियाकला स्थित श्री शंकराचार्य आश्रम में चल रही चातुर्मास्य प्रवचन माला में शिव पुराण की कथा सुनाई गई। आश्रम के प्रभारी डॉ. स्वामी इन्दुभवानन्दतीर्थ महाराज ने कहा कि तप से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। तप से मन और इंद्रियों को नियंत्रित करने की शक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि सच्ची लगन और साधना से व्यक्ति अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। कथा में बताया गया कि ब्रह्मा जी के कहने पर दक्ष ने मां दुर्गा की कठिन तपस्या की। उन्होंने अपनी इंद्रियों को नियंत्रित किया और कुछ समय तक वायु और सूखे पत्तों का आहार लेकर तप किया। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां दुर्गा प्रकट हुईं। दक्ष ने सृष्टि की वृद्धि और संचालन के लिए भगवान शिव का विवाह कराने का वरदान मांगा। माता सती ने भगवान शिव के लिए किया नंदा व्रत महाराज ने बताया कि मां दुर्गा ने दक्ष से कहा कि भगवान शिव अनादि देव हैं और उन्हें प्रसन्न करना आसान नहीं है। इसके बाद भगवती ने स्वयं तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया। भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता सती ने नंदा व्रत किया। कथा के अनुसार, इस व्रत से भगवान शिव प्रसन्न हुए और माता सती को पति के रूप में स्वीकार किया। प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी को होता है नंदा व्रत महाराज ने बताया कि नंदा व्रत प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी को किया जाता है। इन तीनों तिथियों को नंदा तिथि कहा जाता है। आश्विन मास से इस व्रत की शुरुआत करने की परंपरा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की कृपा और सुयोग्य वर की इच्छा रखने वाली महिलाएं यह व्रत कर सकती हैं। कथा से पहले शिव भक्तों ने शिव पुराण की पोथी का पूजन और आरती की। इसके बाद संस्कृत विद्यालय के छात्रों ने वेद पाठ किया।
Source link




