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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तीन दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। इस दौरान वे हिंदू सम्मेलन, युवा संवाद और सामाजिक सद्भावना बैठक सहित कई कार्यक्रमों में भाग लेंगे। आज मोहन भागवत रायपुर में आयोजित युवा संवाद कार्यक्र
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इस कार्यक्रम में डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट, शिक्षक, स्टार्टअप और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े युवा सहित करीब 2 हजार युवाओं के शामिल होने की संभावना है। संघ का मानना है कि समाज की दिशा तय करने में युवाओं की भूमिका निर्णायक होती है।
इस संवाद में डॉ. भागवत युवाओं से राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सामाजिक जिम्मेदारी, करियर के साथ सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक चेतनाजैसे विषयों पर संवाद करेंगे। यह कार्यक्रम प्रदेशभर में प्रस्तावित युवा सम्मेलनों की श्रृंखला की शुरुआत भी माना जा रहा है।
अभनपुर के सोनपैरी गांव में विशाल हिंदू सम्मेलन
युवा संवाद के बाद डॉ. भागवत अभनपुर के सोनपैरी गांव पहुंचेंगे। जहां करीब 10 एकड़ क्षेत्र में विशाल हिंदू सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
सम्मेलन की प्रमुख बातें
- 30 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता का दावा
- प्रदेशभर से संत, समाज प्रमुख और कार्यकर्ता शामिल
विषय
- सनातन संस्कृति
- सामाजिक समरसता
- राष्ट्र चेतना
डॉ. मोहन भागवत इस सम्मेलन में मुख्य वक्ता होंगे, जबकि राष्ट्रीय संत गुरुदेव असंग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। संघ के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ते हुए सांस्कृतिक और सामाजिक एकता को मजबूत करना ह
1 जनवरी को सामाजिक सद्भावना बैठक
नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को राम मंदिर परिसर में सामाजिक सद्भावना बैठक आयोजित की जाएगी। सुबह 9 से 12 बजे तक चलने वाली इस बैठक में समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में सामाजिक समरसता और समकालीन विषयों पर चर्चा की जाएगी।
इस बैठक में सभी समाज और समुदायों के प्रमुख, सामाजिक संगठन, बुद्धिजीवी वर्ग, को आमंत्रित किया गया है। बैठक में सामाजिक सौहार्द, आपसी सहयोग और समरसता जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। संघ इसे समाज में बढ़ते वैचारिक विभाजन के बीच संवाद और संतुलन की पहल के रूप में देख रहा है।
क्यों अहम है यह दौरा ? यह दौरा RSS के शताब्दी वर्ष के दौरान हो रहा है, जिसमें संघ देशभर में बड़े सामाजिक आयोजनों पर जोर दे रहा है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी और युवा आबादी बड़ी है, ऐसे में संघ का युवाओं से सीधा संवाद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हिंदू सम्मेलन के जरिए संघ सामाजिक एकजुटता के साथ अपनी वैचारिक पहुंच को मजबूत करना चाहता है। राजनीतिक रूप से भी राज्य में बदलते सामाजिक समीकरणों के बीच संघ की सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मोहन भागवत का यह तीन दिवसीय दौरा केवल संगठनात्मक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा, समाज और संस्कृति को केंद्र में रखकर संघ की दीर्घकालिक रणनीति को दर्शाता है। आने वाले महीनों में इसका असर सामाजिक और राजनीतिक विमर्श में भी दिख सकता है।
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