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सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा और बढ़ते सड़क हादसों पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।
नेशनल हाईवे सहित प्रदेश की सड़कों पर मवेशियों के कारण होने वाले हादसों को लेकर जनहित याचिका के साथ एक हस्तक्षेप याचिका भी दायर की गई है, जिसमें बिलासपुर से लेकर जांजगीर तक नेशनल हाईवे पर मवेशियों के झुंड की तस्वीरें लगाई गई है। इसमें कहा है कि NHAI यद
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दरअसल, सड़कों पर मवेशियों और बढ़ते हादसों को लेकर हाईकोर्ट में अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हो रही है। मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच में एक नई हस्तक्षेप याचिका प्रस्तुत की गई। इसमें बिलासपुर से जांजगीर तक एनएचएआई की सड़क पर मवेशियों के जमघट की तस्वीरें पेश की गईं। साथ ही कहा गया है कि एनएचएआई अपनी सड़कों की सुरक्षा करने में नाकाम है। अगर, ऐसा है तो इसके लिए लोगों से टोल टैक्स वसूलना गलत है।
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने नए मुख्य सचिव की जॉइनिंग का हवाला देते हुए जवाब के लिए समय मांगा, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़क पर घूम रहे व बैठे मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए तैयार रोडमैप बताया जाए। वहीं, पिछले आदेश के परिपालन में बिलासपुर के कलेक्टर ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया, आवारा पशुओं के प्रबंधन और सड़क हादसे रोकने के लिए किए गए कदमों की जानकारी दी।
तीन माह में तीन घटनाओं में 39 मवेशियों की मौत कलेक्टर ने शपथ पत्र के साथ जुलाई से सितंबर तक सड़क हादसों में मवेशियों की मौतों का आंकड़ा भी दिया। बताया कि 14 जुलाई 2025 को कोटा के ग्राम बारीडीह में तेज रफ्तार वाहन की टक्कर से 13 गायों की मौत और 4 घायल हुईं। वहीं, 28 जुलाई को बिल्हा ब्लॉक में एक अज्ञात वाहन ने 19 गायों को कुचला, जिनमें से 18 की मौत हो गई। 17 सितंबर को गतौरा के पास एनएच -130 पर 8 मवेशियों को कुचलने की घटना हुई। बताया गया कि इन मामलों में चालकों के साथ ही मवेशी मालिकों के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।
नेशनल हाईवे पर लगा रहे सोलर लाइट इसके साथ ही बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर मवेशियों के जमाव वाले स्थानों पर सोलर लाइट लगाई जा रही है। दर्रीघाट और ढेका में इंस्टॉलेशन पूरा हो चुका है। संवेदनशील क्षेत्रों में इंडिकेटर बोर्ड लगाए गए हैं। ग्राम सभाओं में सड़क पर आवारा पशु प्रबंधन को अनिवार्य एजेंडा बनाया गया है। दीवार लेखन, पोस्टर, बैनर के माध्यम से जनजागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। हर महीने मवेशी मालिकों के साथ समीक्षा बैठकें करने के भी निर्देश हैं।
शासन ने कहा- मवेशियों की सुरक्षा के लिए उठाए ये कदम
- घायल मवेशियों के उपचार के लिए भारत सरकार का टोल-फ्री नंबर 1962 जारी किया गया है।
- बिलासपुर जिले में 6 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां सक्रिय हैं।
- जोगीपुर गौ-अभयारण्य में 205 एकड़ भूमि पर 600 पशुओं की क्षमता वाले तीन शेड बनाए गए हैं। कुल 1600 वृद्ध मवेशियों को यहां रखने का लक्ष्य है।
- 7 नई जगहों पर गौधाम स्थापित करने का प्रस्ताव गौ सेवा आयोग को भेजा गया है।
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