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मार्गशीर्ष माह के साथ ही दिसंबर में साल-2025 के चलते-चलते अब केवल 4 दिन विवाह की शहनाइयां बजेंगी। अंतिम मुहूर्त 11 दिसंबर तक है। इसके बाद मुहूर्त सीधे 4 फरवरी से शुरू होंगे, जो जुलाई तक चलेंगे। इस बीच 16 दिसंबर से 14 जनवरी तक खरमास रहेगा, जिसमें मांगलिक कार्य नहीं होंगे। विवाह व अन्य कार्यों की खरीदी के लिए दिसंबर में 14 दिन सर्वार्थ सिद्धि, 3 दिन अमृत सिद्धि और 5 दिन रवि सहित अन्य शुभ योग रहेंगे। दिसंबर 2025 से दिसंबर 2026 तक 13 माह में विवाह के सिर्फ 38 मुहूर्त हैं। जनवरी माह में एक भी दिन शहनाई नहीं गूंजेगी। 25 जुलाई से 20 नवंबर तक देवशयन काल रहेगा।
फरवरी एवं जून माह में जहां 6 दिन तो मार्च, मई, नवंबर एवं दिसंबर में चार दिन शादियां हो सकेंगी। इसी तरह अप्रैल में 3 एवं जुलाई में सिर्फ दो दिन शादी के मुहूर्त हैं। नए साल में शादियों के दिन कम होने की मुख्य वजह धनुर्मास, शुक्र का तारा अस्त होना, मीन मास, अधिकमास, गुरु का तारा अस्त होना एवं भगवान श्रीहरि का शयन काल है। इस साल सबसे अधिक 15 मुहूर्त सिर्फ नवंबर में थे।
व्यंकटेश मंदिर के महंत डॉ. कौशलेंद्र प्रपन्नाचार्य ने बताया कि नवंबर में खूब शादियां हुई। अब 9 रेखा के विवाह मुहूर्त के बाद दिसंबर में 5, 6, 7 और 11 दिसंबर को शहनाइयां गूंजेंगी। 15 दिसंबर को शुक्र ग्रह अस्त हो जाएगा और तारा लगने के साथ ही शादियों पर विराम लग जाएगा। इसके बाद 1 फरवरी को शुक्र उदित होने के बाद फिर से शादियां शुरू होंगी। 15 दिसंबर से 14 जनवरी तक शयन काल भी रहेगा। 14 मार्च से 14 अप्रैल तक मीन मास होने के कारण शादियां नहीं होंगी। 17 मई से 15 जून तक ज्येष्ठ अधिकमास होने की वजह से विवाह के मुहूर्त नहीं हैं। 16 जुलाई से 8 अगस्त तक गुरु का तारा अस्त रहेगा। इस दौरान भी शादियां नहीं हो सकेंगी। इसी तरह 25 जुलाई से 20 नवंबर तक देवशयन काल रहेगा।
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