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प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय आत्मज्ञान भवन आमापारा बालोद के तत्वाधान में आयोजित वाह जिंदगी वाह शिविर में परम सत्ता का ज्ञान विषय पर चर्चा की गई। प्रो. ईवी. गिरीश ने कहा कि परमात्मा को लेकर लोगों के बीच कई प्रकार की गलतफहमियां हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए पूछा कि क्या परमात्मा किसी बीमारी, जैसे कैंसर, को ठीक कर सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि परमात्मा हमारी बीमारी को सीधे ठीक नहीं करता, बल्कि हमें शांति, शक्ति, प्रेम और संबल प्रदान करता है, जिससे व्यक्ति अपनी स्थिति के अनुसार सुधार कर सकता है। उन्होंने बताया कि ईश्वर का वास्तविक स्वरूप केवल ईश्वर को ही ज्ञात है, जबकि सत्य सार्वभौमिक और समान है। जीवन में दुख का मुख्य कारण असत्य और गलत मान्यताओं पर आधारित सोच होती है। इसलिए स्वयं को जानना और समझना परमात्मा को जानने की पहली सीढ़ी है।
स्वयं के प्रति मित्र भाव रखें: शिविर में दो मुख्य संबंधों पर जोर दिया गया स्वयं का स्वयं से संबंध, स्वयं के प्रति मित्र भाव रखना, सेल्फ रिस्पेक्ट, सेल्फ कॉन्फिडेंस और प्यार से अपने मन को समझना। स्वयं का परमात्मा से संबंध, जितना हमारा परमात्मा से संबंध गहरा होगा, हमारा जीवन सुख, शांति, प्रेम और आनंद से भरपूर होगा। प्रो. गिरीश ने कहा कि जब व्यक्ति अपने भीतर शांति और प्रेम विकसित करता है, तो उसे किसी से बाहर से खुशियां या संतोष मांगने की आवश्यकता नहीं रहती। परमात्मा सुख, शांति, प्रेम और आनंद का स्रोत है।
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