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आधुनिक युग में भी छत्तीसगढ़ में बाल विवाह जैसी कुप्रथा थमने का नाम नहीं ले रही है। सरकार, सामाजिक संस्थाओं और प्रशासनिक तंत्र के तमाम प्रयासों के बावजूद ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में अब भी नाबालिग बच्चों की शादी रचाई जा रही है।
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- महिला एवं बाल विकास विभाग के मुताबिक सरगुजा इलाके में ज्यादा मामले
राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले डेढ़ साल में 500 से ज्यादा बाल विवाह के मामले सामने आए हैं। इनमें कई मामले ऐसे हैं, जहां शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी और फेरे शुरू होने से ठीक पहले प्रशासनिक टीम ने पहुंचकर शादी रुकवाई। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कई बार परिवार शादी को सामाजिक परंपरा बताकर बचने की कोशिश करते हैं।
बाल विवाह निवारण अधिनियम 2006 के तहत नाबालिग की शादी कराना अपराध है, लेकिन शिकायत दर्ज कराने से लोग अब भी हिचकिचाते हैं। अधिकतर मामलों में सूचना पड़ोसी, शिक्षक या पंचायत सचिव देते हैं। इसके बाद चाइल्ड मैरिज प्रिवेंशन ऑफिसर और पुलिस मिलकर मौके पर पहुंचते हैं। फिलहाल चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर आस-पड़ोस के लोग कॉल कर इसकी जानकारी दे रहे हैं, जिससे कई बच्चियों का भविष्य खराब होने से बच रहा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 2024-25 में कुल 349 मामले सामने आए थे। इनमें कार्रवाई करते हुए टीम ने 341 बाल विवाह रुकवाए थे। वहीं 2025-26 में अगस्त माह तक कुल 185 मामले विभाग के संज्ञान में आए, इनमें 181 विवाह विभाग ने रुकवाए। यह ऐसे मामले थे, जो संज्ञान में आए। इनमें सबसे ज्यादा मामले सूरजपुर, जांजगीर, बलौदाबाजार, बलरामपुर, बेमेतरा, सुकमा, जशपुर, कवर्धा, मुंगेली आदि जिलों से सामने आए हैं।
राहत भी…रायपुर में 192 ग्राम पंचायत बाल विवाह मुक्त
राजधानी में केस तो कम हैं, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हो पा रहे हैं। रायपुर में 2024-25 में 6 तो इस साल (अगस्त तक) 4 मामले सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार रायपुर के तिल्दा ब्लॉक से ज्यादा मामले संज्ञान में आते हैं। विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, राजधानी में 192 ग्राम पंचायत बाल विवाह मुक्त हो गए हैं। साथ ही 12 नगरीय निकाय क्षेत्रों में पिछले तीन साल में एक भी बाल विवाह के मामले नहीं आए हैं।
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