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Home » The prisoner could have lost his life due to police negligence. | पुलिस की लापरवाही से जा सकती थी कैदी की जान: अंबिकापुर जेल में प्रताड़ित करने का आरोप, भागकर बिलासपुर में किया सरेंडर – Bilaspur (Chhattisgarh) News
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The prisoner could have lost his life due to police negligence. | पुलिस की लापरवाही से जा सकती थी कैदी की जान: अंबिकापुर जेल में प्रताड़ित करने का आरोप, भागकर बिलासपुर में किया सरेंडर – Bilaspur (Chhattisgarh) News

By adminOctober 9, 2025No Comments6 Mins Read
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अंबिकापुर जेल जाने के डर से पी लिया सैनेटाइजर।

अंबिकापुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल से फरार कैदी के सरेंडर को लेकर बिलासपुर पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस की इस लापरवाही से कैदी की जान भी जा सकती थी। अंबिकापुर जेल वापस भेजे जाने से बचने के लिए कैदी ने बुधवार (8 अक्टूबर) को सैनेटाइजर पीकर स

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हालांकि, उसे तुरंत सिम्स में भर्ती कराया गया। अब उसकी हालत खतरे से बाहर है। दरअसल, सरेंडर करने के बाद सिविल लाइन पुलिस ने उसे थाने में रखने के बजाय पहले जेल भेज दिया, जब जेल से दोबारा उसे थाने भेजा गया, तब टीआई ने उसकी पत्नी को फोन कर घर ले जाने बोल दिया।

दरअसल पत्नी का आरोप है कि अंबिकापुर जेल में उसके पति को प्रताड़ित किया जा रहा है। पत्नी का ये भी आरोप है कि जेल में उसे मिलने वाली सुविधाएं भी नहीं दी जाती थी। वो अपने पति की जान बचाने के लिए कई अधिकारियों को अलग-अलग समय में 70 से 80 हजार रुपए दे चुकी है।

कलेक्ट्रेट में सरेंडर करने पर पुलिस ने भेजा बिलासपुर जेल।

कलेक्ट्रेट में सरेंडर करने पर पुलिस ने भेजा बिलासपुर जेल।

जेल प्रहरियों को चकमा देकर भागा था

बता दें कि कैदी मुकेश कांत मस्तूरी क्षेत्र के मल्हार रहने वाला है। हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा हुई है। वह अंबिकापुर जेल में सजा काट रहा था। उसे इलाज के लिए अंबिकापुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, शनिवार (5 अक्टूबर) को वह जेल प्रहरियों को चकमा देकर अस्पताल से फरार हो गया था।

पत्नी बोलीं- टीआई ने फोन कर घर ले जाने कहा

अमरिका बाई ने बताया कि उसका पति रमेश कांत अंबिकापुर अस्पताल से भागकर बिलासपुर पहुंचा तो मंगलवार (7 अक्टूबर) को उसने कलेक्टर के समक्ष सरेंडर कराया। इसके बाद सिविल लाइन पुलिस ने उसे जेल में दाखिल कराया।

पूछताछ के दौरान उसके जेल से फरार होने और मणिपुर थाने में दर्ज एफआईआर की जानकारी मिलने पर जेल प्रशासन ने पुलिस को बुलाया, पर कोई नहीं आया। रात हो जाने पर उसे वापस सिविल लाइन थाने भेजा गया।

प्रहरी उसे थाने में छोड़कर लौट गए, लेकिन पुलिस ने जेल में दाखिल दिखाने के कारण थाने में रखने से इनकार कर दिया। कैदी थाने के बाहर देर तक भटकता रहा। बाद में सिविल लाइन टीआई ने उसकी पत्नी अमरिका बाई को फोन कर थाने बुलाया और उसे घर ले जाने कहा।

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भाग कर पहुंचा बिलासपुर।

अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भाग कर पहुंचा बिलासपुर।

अंबिकापुर जेल जाने के डर से पी लिया सेनेटाइजर

इधर, बुधवार (8 अक्टूबर) को अंबिकापुर पुलिस कैदी को लेने घर पहुंची। दोबारा जेल भेजे जाने के डर से उसने घर के पीछे जाकर सेनेटाइजर पी लिया। पुलिस टीम उसे छोड़कर लौट गई। तबीयत बिगड़ने पर परिवार ने उसे सिम्स में भर्ती कराया, जहां डॉक्टर इलाज कर रहे हैं।

पुलिस की लापरवाही के चलते कैदी ने की आत्महत्या की कोशिश।

पुलिस की लापरवाही के चलते कैदी ने की आत्महत्या की कोशिश।

जेल में प्रताड़ना और अवैध वसूली से परेशान होकर भागा

कैदी मुकेश कांत की पत्नी अमरिका बाई कुर्रे ने कलेक्टर से लिखित शिकायत की है। जिसके मुताबिक, जेल के कुछ अधिकारी और कर्मचारी उसके पति से पैसों की मांग करते थे। पैसे नहीं देने पर उसे जातिगत गालियां देते थे, मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

जेल में उसे मिलने वाली सुविधाएं भी नहीं दी जाती थी। वो अपने पति की जान बचाने के लिए कई अधिकारियों को अलग-अलग समय में 70 से 80 हजार रुपए फोन पे और नकद माध्यमों से दिए, जिसका सबूत भी उसके पास है। इसके बावजूद प्रताड़ना बंद नहीं हुई। हालात इतने बदतर हो गए कि 5 फरवरी को इलाज के दौरान मुकेश अस्पताल से भाग गया।

कैदी की पत्नी ने जेल अफसरों पर अवैध वसूली और प्रताड़ना के लगाए आरोप।

कैदी की पत्नी ने जेल अफसरों पर अवैध वसूली और प्रताड़ना के लगाए आरोप।

पत्नी बोली- पति को बिलासपुर जेल में ही रखा जाए

कैदी की पत्नी ने कहा कि उसका पति कानून का सम्मान करता है और अपनी सजा पूरी करना चाहता है, लेकिन अधिकारियों की लगातार प्रताड़ना के कारण उसे यह कदम उठाना पड़ा।

मंगलवार (7 अक्टूबर) को वह अपने पति को लेकर कलेक्टर के पास सरेंडर कराने के लिए लेकर गई थी। इस दौरान उसने मांग की कि पति उसकी जान की सुरक्षा के लिए उसे अंबिकापुर जेल न भेजा जाए, बल्कि बिलासपुर जेल में ही रहने दिया जाए। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

अस्पताल में तैनात नहीं है कोई पुलिसकर्मी

हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा कैदी 12 साल जेल में रह चुका है। बावजूद इसके सिम्स के तीसरी मंजिल के मेल मेडिकल वार्ड-3 में उसका इलाज सामान्य मरीजों की तरह हो रहा है। परिजन साथ हैं, लेकिन निगरानी के लिए एक भी पुलिस जवान तैनात नहीं है।

साइक्लोफीना टेबलेट के साथ पिया सेनेटाइजर

सिम्स अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि कैदी के पास से साइक्लोफीना टैबलेट और सेनेटाइजर मिला है। टेबलेट खाने के साथ ही उसने सेनेटाइजर पिया है। डॉक्टरों ने उसे ऑब्जर्वेशन में रखा है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद कैदी को अंबिकापुर पुलिस को सौंपने की बात कही जा रही है।

मल्हार में देवी दर्शन कराने ले गई थी पत्नी

रातभर कैदी अपने परिवार के साथ कोनी के घर में था। सुबह उसकी पत्नी उसे मल्हार स्थित डिडेंश्वरी मंदिर दर्शन कराने ले गई। घर लौटने के बाद जब अंबिकापुर पुलिस के आने की सूचना मिली, तो अंबिकापुर जेल ले जाने के डर से उसने घर में रखा सेनेटाइजर पी लिया।

अंबिकापुर जेल में इनके नंबर पर ट्रांसफर किए 1.20 लाख रुपए

शंकर तिवारी 5000, अभिषेक शर्मा 10000, अखिलेश सिंह, लोकेश टोप्पो 30000, ललई बाबा 5000, अनिल बाबा गुप्ता 1500, विजय बहादुर 10000, विजय बहादुर के बेटे को 11000, मनोज सिंह 10000, सौरभ शर्मा 10000, संजय खैरवार 2000, रमेश साहू 2000, निलेश केरकेट्टा 12000, चंद्र प्रकाश लहरे के अकाउंट में 12000 सहित कुल 1 लाख 20 हजार 500 रुपए ट्रांसफर किए गए हैं।

एसएसपी बोले- कैदी को कैसे छोड़ा इसकी जांच कराई जाएगी

जेल दाखिल कर सिविल लाइन पुलिस ने पावती ली थी। जिसके बाद जेल स्टाफ ने कैदी को सिविल लाइन थाना परिसर में छोड़ दिया। किन परिस्थितियों ने कैदी को छोड़ा गया। इस संबंध में सिविल लाइन टीआई से जानकारी ली जाएगी।

कैदी को अंबिकापुर पुलिस लेने आई थी। तभी उसने सेनेटाइजर पी लिया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कैदी की हालत अभी ठीक है। लापरवाही कहां हुई इसकी जांच कराई जाएगी।



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