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समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश की एटा लोकसभा सीट से सांसद देवेश शाक्य को मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। यह फैसला केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि दोनों राज्यों में बदलते राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्य
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एमपी में शाक्य-ओबीसी समीकरण पर फोकस मध्यप्रदेश में शाक्य, कुशवाहा, मौर्य और सैनी जैसी ओबीसी जातियों की संख्या और राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ा है। देवेश शाक्य को प्रभारी बनाकर सपा ने इन वर्गों में सीधा संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी ओबीसी नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि इससे भाजपा और कांग्रेस के बीच बंटे ओबीसी वोट बैंक में सपा के लिए जगह बनाने का प्रयास होगा।
विधानसभा में सपा की रही है मौजूदगी
- मध्यप्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी भले ही फिलहाल सीमित दिखती हो, लेकिन उसका इतिहास पूरी तरह शून्य नहीं रहा है।
- 1990 और 1993 के विधानसभा चुनावों में सपा और उससे जुड़े समाजवादी दलों के करीब 10 से ज्यादा विधायक विधानसभा में पहुंचे थे।
- 1998 और 2003 में यह संख्या घटकर 2 से 3 विधायकों तक सिमट गई।
- 2018 विधानसभा चुनाव में सपा ने 2 सीटें जीतीं और कमलनाथ सरकार के गठन के दौरान इन विधायकों की भूमिका राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही थी।
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