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हाई कोर्ट ने विकलांगों के कल्याण के नाम पर चलाए जा रहे स्टेट रिसोर्स सेंटर (एसआरसी) और फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर (पीआरआरसी) में हुए करीब 1000 करोड़ के घोटाले में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस संजय कुमार जायस
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हाई कोर्ट ने सीबीआई को पहले से दर्ज एफआईआर पर आगे बढ़ने, दस्तावेज जब्त करने और जांच जल्द पूरी करने के निर्देश दिया। बता दें कि हाई कोर्ट ने वर्ष 2020 में मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए थे। जांच रिपोर्ट में 31 वित्तीय अनियमितताएं पाई गईं। इसमें कई साल तक कोई ऑडिट न होना भी शामिल है। लेकिन राज्य सरकार ने इसे केवल प्रशासनिक खामी बताया।
सीबीआई ने हाई कोर्ट को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच रोक दी गई थी, लेकिन अगर कोर्ट आदेश देता है तो वह जांच फिर से शुरू करने के लिए तैयार है। इस पर हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और उच्चाधिकारियों की कथित संलिप्तता को देखते हुए सीबीआई को जांच जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
वर्ष 2004 में स्टेट रिसोर्स सेंटर यानी एसआरसी नाम की एक स्वशासी संस्था बनाई गई थी। इसका उद्देश्य दिव्यांगों के पुनर्वास में तकनीकी मदद करना था। वर्ष 2012 में इसी के तहत ‘फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर यानी पीआरआरसी की स्थापना की गई, जिसका काम दिव्यांगों को कृत्रिम अंग और उपचार उपलब्ध कराना था।
इस बीच दोनों संस्था के नाम पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें मिलीं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मिले दस्तावेजों से पता चला कि संस्था सिर्फ कागजों में थी, दिव्यांगों के नाम पर सरकार से करोड़ों रुपए अनुदान लेकर गड़बड़ी की जा रही थी। संस्था के पदाधिकारी प्रदेश के कई सीनियर आईएएस थे। इस मामले में रायपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने एडवोकेट देवर्षि ठाकुर के जरिए वर्ष 2018 में जनहित याचिका लगाई थी।
आरोप- कर्मचारियों की नियुक्ति के बगैर निकाले करोड़ों रुपए: याचिका में आरोप लगाया कि ये दोनों संस्थान केवल कागजों पर चल रहे थे। कर्मचारियों की नियुक्ति के बिना ही उनके वेतन के नाम पर करोड़ों रुपए निकाले जा रहे थे। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके नाम पर भी पीआरआरसी में काम करने का फर्जी रिकॉर्ड बनाकर वेतन निकाला गया, जबकि उसने कभी वहां आवेदन या काम नहीं किया। आरोप लगाया कि 1000 करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया है।
पूर्व मंत्री- कई अधिकारियों समेत 31 पर हैं आरोप याचिका में पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह, रिटायर्ड आईएएस विवेक ढांड, एमके राउत, आलोक शुक्ला, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल, सतीश पांडे, पीपी श्रोती समेत कई नाम शामिल हैं। हालांकि, हाई कोर्ट ने पूर्व मंत्री रेणुका सिंह के खिलाफ कोई आदेश नहीं दिया है, क्योंकि याचिका में उनके खिलाफ स्पष्ट मांग नहीं थी।
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