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पीएम पोषण योजना को लेकर कांग्रेस के पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने गंभीर अनियमितताओं और खतरनाक लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाए कि जिन बच्चों को पौष्टिक और सुरक्षित भोजन मिलना चाहिए, उन्हें ऐसे बर्तनों में खाना परोसा जा रहा है, जिनक
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उपाध्याय ने बताया कि केंद्र सरकार ने PM पोषण अधिकारियों को सर्कुलर जारी कर कहा था कि एल्युमीनियम के बर्तनों में खाना बनाना और परोसना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। सर्कुलर में यह भी बताया गया है कि लगातार एल्युमिनियम के संपर्क में आने से शरीर में जहरीले तत्व जमा होते हैं, जिससे कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके बावजूद छत्तीसगढ़ में स्कूलों में बड़े पैमाने पर इसी धातु के बर्तनों का उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने करीब 28 से 30 हजार अल्युमिनियम कुकरों का ऑर्डर दिया है, जिसकी कुल कीमत लगभग 6 करोड़ रुपए है। कांग्रेस नेता का आरोप है कि इस पूरे मामले में टेंडर प्रक्रिया को मनमर्जी से चलाया गया और नियम-कानून को पूरी तरह अनदेखा किया गया। उन्होंने कहा कि सिर्फ 3 से 4 ठेकेदारों को ही इसका फायदा पहुँचाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका गहरा रही है।
जेल में कैदियों को मिलता था एल्युमीनियम के बर्तन में खाना
विकास उपाध्याय ने यह भी कहा कि पहले एल्युमिनियम के बर्तन जेलों में कठोर सजा पाए कैदियों को दिए जाते थे, क्योंकि इन्हें स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। लेकिन आज यही बर्तन स्कूलों में कुपोषित और गरीब बच्चों को परोसे जा रहे भोजन के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और सरकार को इस पर तुरंत स्पष्टीकरण देना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया—“जब केंद्र का सर्कुलर साफ कहता है कि एल्युमिनियम बर्तन हानिकारक हैं, तो फिर छत्तीसगढ़ में इन्हीं बर्तनों की खरीद क्यों की जा रही है? यह किसे फायदा पहुंचाने के लिए किया गया?”
पार्टी मांग करती है कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों, संबंधित विभागों और ठेकेदारों पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की जाए। उपाध्याय ने कहा कि बच्चों की सेहत के सवाल पर राजनीति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी की जरूरत है।
कांग्रेस का कहना है कि यह मामला न सिर्फ वित्तीय अनियमितता का है, बल्कि लाखों बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी।
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