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Home » Respectful burial of the dead body is a fundamental right | मुक्तिधाम गए थे चीफ जस्टिस, अव्यवस्था देख नाराज हुए: ​​​​​​​दशहरा अवकाश पर सुनवाई की, कहा- शव का सम्मानजनक विदाई मौलिक अधिकार, CS से मांगा शपथ – Bilaspur (Chhattisgarh) News
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Respectful burial of the dead body is a fundamental right | मुक्तिधाम गए थे चीफ जस्टिस, अव्यवस्था देख नाराज हुए: ​​​​​​​दशहरा अवकाश पर सुनवाई की, कहा- शव का सम्मानजनक विदाई मौलिक अधिकार, CS से मांगा शपथ – Bilaspur (Chhattisgarh) News

By adminSeptember 30, 2025No Comments4 Mins Read
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राज्य सरकार-कलेक्टर और पंचायत विभाग को तत्काल कार्रवाई करने दिए निर्देश।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा रविवार (28 सितंबर) को बिल्हा के मुक्तिधाम पहुंचे। जहां उन्होंने चारों तरफ अव्यवस्था और गंदगी देखी। वे किसी न्यायिक अधिकारी के पिता के निधन पर पहुंचे थे। जिसके बाद उन्होंने इस बदहाली पर संज्ञान लिया।

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हाईकोर्ट में इन दिनों दशहरा पर्व की छुट्टी चल रही है। बावजूद इसके चीफ जस्टिस ने जनहित याचिका मानकर सुनवाई की और कहा कि मृत्यु के बाद शव का सम्मानजनक विदाई संवैधानिक और मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार, कलेक्टर और ग्राम पंचायत को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

मुक्तिधाम की स्थिति देख हैरान हुए चीफ जस्टिस

बिलासपुर के बिल्हा ब्लॉक के ग्राम रहंगी स्थित मुक्तिधाम का मामला है। दरअसल, हाईकोर्ट के अधिकारी-कर्मचारियों के लिए बोदरी में आवासीय परिसर बना है। रविवार (28 सितंहर) को हाईकोर्ट के एक न्यायिक अधिकारी के पिता का निधन हो गया। लिहाजा, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा उनकी अंत्येष्टि में शामिल होने ग्राम पंचायत रहंगी के मुक्तिधाम पहुंचे थे।

वहां की स्थिति देख चीफ जस्टिस हैरान रह गए। उन्होंने देखा कि मुक्तिधाम में कोई बाउंड्रीवॉल या फेंसिंग नहीं है। पहुंचने का रास्ता गड्ढों से भरा है और बारिश में पानी भर जाता है, जिससे लोगों का पहुंचना मुश्किल होता है। जगह- जगह झाड़ियां और जंगली घास है। जहां सांप और जहरीले कीड़ों के आने की आशंका है।

सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। अंतिम संस्कार के बाद फेंके गए कपड़े, पॉलीथिन, शराब की बोतलें और कचरा इधर-उधर बिखरा पड़ा है। यहां कचरा फेंकने डिब्बा तक नहीं है।

शेड, लाइट और बैठने की भी व्यवस्था नहीं

मुक्तिधाम में लाइट नहीं है, शेड नहीं है। बैठने की व्यवस्था नहीं, जिससे लोगों को घंटों खुले आसमान के नीचे खड़े रहना पड़ता है। कोई अधिकृत व्यक्ति या केयरटेकर नहीं, जिससे मदद मांगी जा सके। साइनबोर्ड पर मोबाइल नंबर तक नहीं। शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। मुक्तिधाम के बगल में ही सॉलिड और वेट वेस्ट मैनेजमेंट शेड बना है।

जनहित याचिका मानकर दशहरा अवकाश के दिन की सुनवाई

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने इस अव्यवस्था को लेकर जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है। दशहरा अवकाश के बीच सोमवार को उन्होंने इस मामले की सुनवाई की। इस दौरान राज्य सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही शासन, कलेक्टर और ग्राम पंचायत को अव्यवस्था दूर करने तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट बोला- मृतक का सम्मान राज्य सरकार की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा है कि जब कोई व्यक्ति स्वर्गवासी होता है, तो उसके पार्थिव शरीर को सम्मानजनक विदाई मिलनी चाहिए। यह कोई वस्तु नहीं कि अमानवीय तरीके से निपटाया जाए। परिवार और रिश्तेदार भावनाओं से जुड़े होते हैं और शांत वातावरण में विदाई चाहते हैं।

राज्य सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता की व्यवस्था करे। ऐसा न करना संविधान, नगरपालिका अधिनियम और पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है। ऐसी स्थिति पूरे राज्य, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां मुक्तिधाम को सबसे कम प्राथमिकता दी जाती है।

ग्राम पंचायत को भी बनाया पक्षकार

उप महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने कहा कि जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के अधिकारी तत्काल मुक्तिधाम का दौरा करेंगे। उन्होंने पंचायत एवं सामाजिक कल्याण विभाग के सचिव को भी पक्षकार बनाने की मांग की, जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया है।

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, पंचायत सचिव और बिलासपुर के कलेक्टर को व्यक्तिगत शपथ पत्र देने के निर्देश दिए हैं। केस की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।

राज्य को इन बिंदुओं पर दिए सख्त निर्देश

  • कोर्ट ने राज्य प्रशासन, जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
  • सफाई अभियान चलाकर कचरा, घास, गंदा पानी हटाएं।
  • टूटे प्लेटफॉर्म, रास्ते, शेड और दीवारों की मरम्मत कराएं।
  • पानी-बिजली की व्यवस्था कर नल और लाइटें लगाएं।
  • परिजनों के लिए शेल्टर और बैठने की व्यवस्था करें।
  • महिला व पुरुष के लिए दो शौचालय बनवाएं। डस्टबिन रखें, रोज सफाई कराएं।
  • अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी या एलपीजी उपलब्ध कराएं, इलेक्ट्रिक शवदाह गृह चालू रखें, राख विसर्जन क्षेत्र बनाएं।
  • दो सफाईकर्मी और एक केयरटेकर तैनात करें, नोडल अधिकारी नियुक्त करें।
  • रिकॉर्ड मेंटेन करने रजिस्टर रखें, हेल्पलाइन नंबर लगाएं।
  • कलेक्टर की अगुवाई में कमेटी बनाएं, जिसमें नगरपालिका, स्वास्थ्य अधिकारी और एनजीओ शामिल हों।
  • सभी मुक्तिधामों के लिए फंड आवंटित करें।
  • मुक्तिधामों के लिए गाइडलाइन बनाएं।



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