रायपुर10 घंटे पहले
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ब्रज परंपरा के अनुसार ठाकुरजी का पतंग उत्सव भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।
25 मई को गंगा दशहरा का पर्व चार शुभ महायोगों के संयोग में मनाया जाएगा। आमतौर पर दशहरा का जिक्र होते ही रावण दहन और बुराई पर अच्छाई की विजय का दृश्य याद आता है, लेकिन इस बार शहर में दशहरा का स्वरूप कुछ अलग नजर आएगा।
एक तरफ मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का पावन उत्सव श्रद्धा और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाएगा, तो दूसरी ओर ब्रज परंपरा के अनुसार ठाकुरजी का पतंग उत्सव भी आकर्षण का केंद्र रहेगा। यानी एक ही दिन शहर में भक्ति और उल्लास के दो अलग-अलग रंग दिखाई देंगे।
श्रद्धालु गंगा स्नान, भगवान शिव की पूजा और दान-पुण्य कर पापों-पितृ दोष से मुक्ति की कामना करेंगे। वहीं गिरिराज और गोपाल मंदिरों में ब्रज शैली में पतंग उत्सव की विशेष तैयारियां की गई हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. दत्तात्रेय होस्केरे के मुताबिक पुराणों में वर्णन है कि ज्येष्ठ शुक्ल दशमी और हस्त नक्षत्र के दिन मां गंगा भगवान शिव की जटाओं से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। इस बार भी गंगा अवतरण के समय बनने वाले शुभ योगों जैसा संयोग बन रहा है।
गंगा दशहरा पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, सौम्य योग और मानस योग का विशेष प्रभाव रहेगा। मान्यता है कि इस दिन स्नान और घी, शक्कर, जल, स्वर्ण समेत 10 प्रकार की वस्तुओं का दान करने से दस प्रकार के पापों का नाश होता है और व्यक्ति को कष्टों से मुक्ति मिलती है।
पूजा और स्नान के शुभ मुहूर्त
प्रातः काल: 4.40 से 5.23 बजे तक अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11.36 से 12.24 बजे तक गोधूलि मुहूर्त: शाम 7.20 से 7.40 बजे तक
गंगा दशहरे पर मंदिरों में रहेगा ब्रज संस्कृति का रंग
गिरिराज मंदिर
बूढ़ापारा स्थित गिरिराज मंदिर में दशहरा पर्व पर ब्रज परंपरा के अनुसार पतंग उत्सव मनाया जाएगा। मंदिर के मुखिया अभिषेक त्रिवेदी ने बताया कि ठाकुरजी के यमुना तट पर पतंग उड़ाने की भावना को जीवंत करने के लिए मंदिर में विशेष कुंड तैयार किया जाएगा। इसी वातावरण में ठाकुरजी गोपियों और ग्वालबालों के साथ पतंग उड़ाते हुए विराजेंगे। मंदिर परिसर को भी विभिन्न रंगों की पतंगों से सजाया जाएगा।
गोपाल मंदिर
सदर बाजार स्थित गोपाल मंदिर में भी दशमी पर्व को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। ट्रस्टी राजकिशोर नत्थानी ने बताया कि ब्रज परंपरा के अनुरूप यहां भी पतंग उत्सव का आयोजन होगा। मंदिर परिसर में पतंगों से आकर्षक सजावट की जाएगी और ठाकुरजी का विशेष शृंगार किया जाएगा। शाम के समय श्रद्धालुओं को दशहरा मनोरथ के दर्शन होंगे। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहेंगे और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाएगा।

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