Raipur Jagannath Rath Yatra 2026

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के अवसर पर आज प्रदेशभर में रायपुर शहर के प्रमुख जगन्नाथ मंदिरों से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। शहर के अलग-अलग हिस्सों में रथयात्रा के लिए अलग-अलग समय और रूट तय किए गए हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की सं
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इस यात्रा के पहले शहर के अलग-अलग मंदिरों में जगन्नाथ भगवान की यात्रा को लेकर तैयारियां की गई। मंदिरों को फूलों से सजाया गया है, इसके अलावा जिन मार्गो से रथ यात्रा निकलेगी। वहां साफ सफाई भी करवाई गई है।
रथयात्रा के दौरान शहर के इन मार्गों पर श्रद्धालुओं की भीड़ और यातायात का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों से अपील की गई है कि यात्रा मार्गों को ध्यान में रखते हुए अपनी आवाजाही की योजना बनाएं और प्रशासन-यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
देखिए पहले ये तस्वीरें-

भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है।

ओडिशा के कलाकारों ने तीनों रथों को तैयार कर लिया है।

महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है।
अब जानिए किन रास्तों से निकलेगी यात्रा
- गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर से दोपहर 1 बजे रथयात्रा निकलेगी। यात्रा मंदिर से शुरू होकर खम्हारडीह थाना तक जाएगी और फिर वापस मंदिर पहुंचेगी।
- वहीं टूरी-हटरी स्थित जगन्नाथ मंदिर से निकलने वाली रथयात्रा लोहार चौक, पुरानी बस्ती थाना, कंकालीपारा, तात्यापारा, आमापारा, लखेनगर और टिल्लू चौक होते हुए वापस मंदिर पहुंचेगी। इसके अलावा बहुड़ा यात्रा के दिन भगवान को दोबारा मंदिर लाया जाएगा।
- सदर बाजार स्थित जगन्नाथ मंदिर से शाम 4 बजे रथयात्रा निकलेगी। इसका मार्ग मंदिर से कोतवाली चौक, मालवीय रोड, जवाहर चौक, फूल चौक होते हुए एमजी रोड स्थित पुजारी निवास तक रहेगा।
- वहीं गुड़ियारी पड़ाव स्थित मंदिर से दोपहर 12:30 बजे रथयात्रा शुरू होगी, जो गुड़ियारी क्षेत्र, स्टेशन रोड, तेलघानी नाका, अग्रसेन चौक, आमापारा, तात्यापारा, बंजारीपारा, राठौर चौक और गुरु नानक चौक होते हुए स्टेशन रोड से वापस मंदिर पहुंचेगी।
ओडिशा के कलाकारों ने संवारी रथ और मंदिर की भव्यता
रथयात्रा की तैयारियों के तहत इस बार भी ओडिशा से आए कलाकार गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में पारंपरिक शैली की पेंटिंग और आकर्षक सजावट कर रहे हैं। मंदिर की दीवारों, प्रवेश द्वार और रथों को पुरी की तर्ज पर रंग-बिरंगे धार्मिक चित्रों और पारंपरिक अलंकरण से सजाया जा रहा है।
वहीं महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा की पूजा-अर्चना और रथयात्रा के सभी धार्मिक अनुष्ठानों को विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए ओडिशा से पुजारियों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि रायपुर में भी श्रद्धालुओं को पुरी जैसी आध्यात्मिक अनुभूति मिल सके।

500 साल पुराना टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर
रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में शामिल है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर को पहले ‘साहूकार मंदिर’ के नाम से जाना जाता था। भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा स्थापित होने के बाद धीरे-धीरे इसकी पहचान जगन्नाथ मंदिर के रूप में बनी।
मंदिर का निर्माण अग्रवाल परिवार ने कराया था। अंग्रेजों के शासनकाल में एक अग्रवाल साहूकार ने मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण कराया। इसी वजह से लंबे समय तक इसे साहूकार मंदिर कहा जाता रहा। समय के साथ यहां भगवान जगन्नाथ की आराधना शुरू हुई और मंदिर की पहचान बदल गई।
एक ही परिसर में कई देवी-देवताओं के मंदिर
टुरी-हटरी का जगन्नाथ मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ के अलावा श्रीराम दरबार, दो शिव मंदिर, संतोषी माता मंदिर, गरुड़ मंदिर और संकटमोचन हनुमान मंदिर भी स्थापित हैं। इसी कारण यह मंदिर सालभर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहता है।
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महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है।
रायपुर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा से पहले एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां महाप्रभु के रथ के मार्ग की सफाई साधारण झाड़ू से नहीं, बल्कि करीब सवा किलो वजनी 2 सोने की झाड़ुओं से की जाती है। ये दोनों झाड़ू पूरे साल तिजोरी में सुरक्षित रखी जाती हैं और केवल रथयात्रा के दिन ही बाहर निकाली जाती हैं।




