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मध्यप्रदेश में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के पीने से करीब 20 बच्चों की मौत चुकी है। बैन के बाद भी देशभर में अलग-अलग कंपनियां इसी फार्मूले की कफ सिरप बाजार में बेच रही हैं। इसे लेकर भास्कर ने पड़ताल की, जिसमें पता चला कि राजधानी में भी इसी फार्मूले की कफ सिरप
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गुरुवार को ड्रग इंस्पेक्टरों ने अलग-अलग मेडिकल स्टोर्स पर जाकर जांच की है। जांच में फिलहाल किसी भी मेडिकल दुकान में कोल्ड्रिफ सिरप नहीं मिली है। लेकिन, कुछ स्थानों से कुछ नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेजे गए हैं।
बच्चों की मौत के बाद से केंद्र से एक एडवायजरी जारी की गई है। इसमें कहा गया है कि दो साल से छोटे बच्चों के लिए कफ सिरप बिल्कुल नहीं देना है। वहीं इसके ऊपर के उम्र बच्चों को भी बिना डॉक्टरी सलाह के कफ सिरप नहीं देना है।
इसे लेकर सभी ड्रग इंस्पेक्टरों ने अपने-अपने क्षेत्र के मेडिकल स्टोर्स वालों को चेतावनी दी है कि वह बच्चों को कफ सिरप बिना डॉक्टरी सलाह के न दें। इसके बाद भास्कर ने भी इसकी हकीकत जानने शहर के कुछ मेडिकल स्टोर्स पर पड़ताल की।
बिना डॉक्टरी सलाह के नहीं मिली मेडिसिन
भास्कर ने भाठागांव, तेलीबांधा, श्याम नगर, मठपुरैना, भनपुरी, खमतराई, गुढ़ियारी, कोटा, समता कॉलोनी आदि जगहों के मेडिकल स्टोर्स में जाकर 2 साल के बच्चों के लिए कफ सिरप मांगा। लेकिन, मेडिकल वालों ने कहा कि बच्चों के लिए कफ सिरप सिर्फ डॉक्टर की सलाह और उनकी पर्ची के बाद ही दी जाएगी। इस दौरान भास्कर टीम शंकर मेडिकल स्टोर पहुंची और कहा कि बच्चे को काफी सर्दी है और कफ भी है। सिरप चाहिए तो कर्मचारियों ने कहा कि पहले डॉक्टर के पास जाइए, वह कहेंगे तभी सिरप दी जाएगी।
इसलिए मचा हड़कंप दरअसल, मध्यप्रदेश में 7 सितंबर से एक-एक कर कई बच्चों की मौत हो रही थी। छह बच्चों की मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया और 23 सितंबर को इस तरह हो रही बच्चों की मौत पर अधिकारियों ने जांच शुरू की। जांच में पता चला कि बच्चों की मौत कफ सिरप पीने के बाद किडनी फेल होने से हो रही है।
ये सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम जिले में श्रीसन फार्मास्युटिकल्स कंपनी बनाती थी। यह सिरप छिंदवाड़ा और आसपास के कस्बों में बिक्री के लिए उपलब्ध था। तमिलनाडु ड्रग कंट्रोल विभाग की रिपोर्ट में इस कंपनी के सिरप के एक बैच में 48.6 प्रतिशत डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया। यह वही जहरीला रसायन है जिससे पहले भी गाम्बिया, उज्बेकिस्तान और भारत में बच्चों की मौतें हो चुकी हैं। इस रिपोर्ट के बाद मध्य प्रदेश ड्रग कंट्रोल विभाग ने 4 अक्टूबर को कफ सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया था।
^मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के मामले में प्रदेश में भी कोल्ड्रिफ सिरप की उपलब्धता की जांच की जा रही है। फिलहाल अब तक कोल्ड्रिफ सिरप नहीं मिला है। लेकिन कुछ अन्य सिरप के नमूने जांच के लिए लैब भेजे गए हैं। -डॉ बेनीराम साहू, ड्रग अधिकारी, छत्तीसगढ़
तमिलनाडु: जानलेवा कफ सिरप बनाने वाली कंपनी का मालिक गिरफ्तार, चेन्नई में छिपा था
जिस कोल्ड्रिफ कफ सिरप को पीकर मध्यप्रदेश में अब तक 22 बच्चों की मौत हो गई, उसे बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा का मालिक गोविंदन रंगनाथन गिरफ्तार कर लिया गया है। उस पर 20 हजार का इनाम घोषित हुआ था। छिंदवाड़ा और चेन्नई पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए रंगनाथन को चेन्नई स्थित फ्लैट से दबोचा।
तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित उसकी फैक्ट्री में ही कोल्ड्रिफ सिरप बना था। पुलिस फैक्ट्री को सील कर चुकी है। छिंदवाड़ा के एसपी अजय पांडे ने बताया कि रंगनाथन को चेन्नई की मेट्रोपॉलिटन कोर्ट में पेश किया गया। जल्द ही उसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर छिंदवाड़ा लाएंगे। बता दें कि छिंदवाड़ा के सरकारी अस्पताल में बीमार बच्चों को यह सिरप दिया गया था। सिरप देने वाला डॉक्टर पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।
अब सख्ती… देश में सभी दवा कंपनियों की जांच होगी नई दिल्ली| मप्र में बच्चों की मौत के बाद जागा सेंट्रल ड्रग रेगुलेटर सीडीएससीओ अब देशभर में कफ सिरप बनाने वाली कंपनियों की जांच करेगा। इसके लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया गया है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से ऐसी कंपनियों की लिस्ट मांगी गई है। अभियान के दौरान जांच के अलावा कंपनियों का ऑडिट भी किया जाएगा।
सीडीएससीओ सूत्रों ने बताया कि किसी भी राज्य ने पूरी तरह से करेक्टिव एंड प्रिवेंटिव एक्शन गाइडलाइंस का पालन नहीं किया है। ये गाइडलाइंस दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई हैं। इसके अलावा, ड्रग कंट्रोल जनरल ऑफ इंडिया ने भी अपनी एडवाइजरी में कहा है कि कई फैक्ट्रियों में जांच के दौरान खराब क्वालिटी की दवाएं बनती मिलीं। कई जगह दवाओं में मिलाए जाने वाले तत्वों व पदार्थों की जांच नहीं हो रही थी।
सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई… सुप्रीम कोर्ट बच्चों की मौत के मामले की सीबीआई जांच और दवा सुरक्षा की समीक्षा की मांग पर सुनवाई करेगा। मामले में एक जनहित याचिका दायर है।
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