कोण्डागांव, 05 दिसंबर 2025। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ की मदद से कोण्डागांव जिले के छोटेराजपुर गांव की प्रमिला मरकाम ने पारंपरिक रॉट आयरन कला को नई पहचान दी है। अपनी मेहनत और कौशल से उन्होंने सालाना लगभग 5 लाख 40 हजार रुपये की आय अर्जित क
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पहले प्रमिला का परिवार मजदूरी और कृषि पर निर्भर था। पवित्रा स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने रॉट आयरन से 80 से अधिक प्रकार की कलाकृतियां बनानी शुरू कीं।
बिहान की सहायता से प्रमिला की कला को बड़े मंच मिले। उन्होंने गुजरात, गोवा, दिल्ली, असम और नोएडा जैसे कई राज्यों में आयोजित आजीविका सरस मेलों में हिस्सा लिया। इन मेलों के माध्यम से प्रमिला अब तक लगभग 12 लाख रुपये की आय प्राप्त कर चुकी हैं।
बस्तर की समृद्ध कला-संस्कृति को दर्शाती प्रमिला ने अब तक 1500 से अधिक कलाकृतियां तैयार की हैं, जिनकी कुल लागत करीब 30 लाख रुपये है। इनमें से 857 कलाकृतियों का विक्रय सरस मेलों, गैलरियों और स्थानीय बाजारों से किया गया, जिससे उन्हें 13 लाख रुपये की आय हुई।
हाल ही में 06 सितंबर 2025 को दिल्ली में आयोजित सरस मेले में प्रमिला ने 496 उत्पाद बेचकर 3 लाख 87 हजार 500 रुपये की रिकॉर्ड आय अर्जित की। उनकी कला अब न केवल उनकी आजीविका का मजबूत आधार बन चुकी है, बल्कि बस्तर की पारंपरिक संस्कृति को देशभर में नई पहचान भी दिला रही है।
प्रमिला मरकाम ने बताया, “बिहान के माध्यम से रॉट आयरन कला को नया विस्तार और पहचान मिली है। शासन-प्रशासन ने जो सहयोग दिया, उसके लिए मैं आभारी हूं।”


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