बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों ने रीढ़ की विकृति और दोनों पैरों में पोलियो से ग्रस्त एक महिला की सफल सर्जरी की है। यह सर्जरी काफी जटिल और जोखिमपूर्ण थी, जिसके कारण निजी अस्पतालों ने पहले इलाज करने से इनकार कर दिया
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सिम्स प्रबंधन के अनुसार, पीड़ित महिला को चलने-फिरने में अत्यधिक कठिनाई हो रही थी। वह पिछले कई महीनों से पेट में तेज और असहनीय दर्द से जूझ रही थी।
जांच के दौरान, मरीज के गर्भाशय में एक बड़ी गांठ (ट्यूमर) का पता चला। सर्जरी के बाद, सिम्स प्रबंधन ने दावा किया है कि मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और वह तेजी से ठीक हो रही हैं।



इस सर्जरी का नेतृत्व प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता रमन जोगी ने किया। उनकी टीम में डॉ. दीपिका सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रचना जैन और पीजी रेजिडेंट डॉ. दीक्षा चंद्राकर शामिल थीं।
एनेस्थीसिया टीम का मार्गदर्शन एनेस्थीसिया विभाग की प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मधुमिता मूर्ति ने किया। इस टीम में डॉ. भावना रॉयजादा, डॉ. श्वेता कुजूर, डॉ. मिल्टन देबर्मन और डॉ. सुरभि बंजारे भी शामिल थे, जिन्होंने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी एनेस्थीसिया को कुशलता से संभाला।
सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस सर्जरी को सिम्स संस्थान की चिकित्सा क्षमताओं, विशेषज्ञता और टीमवर्क का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि सिम्स बिलासपुर की यह उपलब्धि चिकित्सा क्षेत्र में समर्पण, निष्ठा और उत्कृष्टता का प्रेरक उदाहरण है।
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