![]()
राजधानी में हर साल तेजी से वाहनों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन प्रदूषण की जांच करने वालों की संख्या उतनी ही तेजी से कम हो रही है। रायपुर में 20 लाख से ज्यादा गाड़ियां रजिस्टर्ड हैं। इनमें से आधे वाहनों के पास भी पीयूसी कार्ड नहीं है। सभी गाड़ियों को
.
शहर की सड़कों पर उड़ रही धूल और गाड़ियों से निकलने वाला धुआं लोगों के आबोहवा पर असर डाल रहा है। इसके बावजूद लोग पॉल्यूशन कंट्रोल कार्ड बनवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। अफसरों की भी इसमें कोई रुचि नहीं है। जानकारी के अनुसार पिछले दो साल में रायपुर में करीब 2.50 लाख गाड़ियों को ही पीयूसी कार्ड जारी किए गए हैं। इसमें भी बाइक वालों की संख्या सबसे कम है। कार वाले भी जुर्माना होने के डर से ही सर्टिफिकेट ले रहे हैं।
मालवाहक वाहन इसलिए पीयूसी कार्ड ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें राज्य के बाहर जाना पड़ता है। बॉर्डर पर इस कार्ड की जांच होती है। सर्टिफिकेट नहीं होने पर तगड़ा जुर्माना लगता है, इसलिए वे हर साल इसे अनिवार्य तौर पर बनवा रहे हैं। बाकी गाड़ी वाले इस नियम को नहीं मान रहे हैं। इधर, जिम्मेदारों का ध्यान जांच से अधिक वसूली पर है।
एक से 10 हजार रुपए तक जुर्माने का है प्रावधान
पीयूसी कार्ड नहीं होने पर बाइक, कार, मालवाहक वाहनों पर अलग-अलग जुर्माना लगता है। यह जुर्माना एक हजार से 10 हजार रुपए तक होता है। नियमानुसार गाड़ी खरीदने के एक साल बाद ही प्रदूषण मानक की चेकिंग अनिवार्य है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार प्रकरण गंभीर होने पर सजा और लाइसेंस निलंबित करने दोनों का प्रावधान हैं।
भास्कर नॉलेज – देशभर के रिसर्च में दावा, ग्रीन हाउस गैस कम नहीं हो रही
देश के कई राज्यों में ऑटोमोबाइल और प्रदूषण पर आधुनिक संस्थान रिसर्च कर रहे हैं। इन संस्थानों की ओर से नए आधुनिक वाहनों की भी जांच कराई जा रही है। आईसीसीटी-अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ परिवहन परिषद व अन्य संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि आधुनिक वाहनों के इंजन से भी ग्रीन हाउस गैस कम नहीं हो रही हैं। डीजल कार्बन व सल्फर को बढ़ा रहा है।
आईसीसीटी की रिपोर्ट बताती है कि पीयूसी टेस्ट भी पीएम-2.5 व गैसीय उत्सर्जन पूरी तरह से जांच नहीं पाते हैं। इंजन श्रेणी में देखें तो हल्के मालवाहक कारों की तुलना में नॉक्स 5 गुना, कार्बन 6 से 7 गुना उत्सर्जित कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि रायपुर में भी इसी तरह की स्थिति है। तीन पहिया मालवाहक भी पेट्रोल की जगह डीजल व अन्य ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। इनसे बड़ी मात्रा में खतरनाक गैसीय उत्सर्जन होती है।
15 साल पुरानी गाड़ी वाले भी नहीं ले रहे सर्टिफिकेट
शहर में 15 साल पुरानी गाड़ियों की संख्या करीब तीन लाख है। ये गाड़ी वाले भी पीयूसी कार्ड नहीं ले रहे हैं। चौंकाने वाले बात ये है कि ऐसी गाड़ियों को परमिट भी जारी किया जा रहा है। राजधानी में पीयूसी सेंटर स्थायी नहीं है। ज्यादातर वैन में मशीनों को रखकर सड़क पर खड़े होकर गाड़ियों की जांच की जा रही है। सभी पेट्रोल पंप वालों को भी इन सेंटरों को खोलना है। लेकिन रायपुर में इक्का-दुक्का पेट्रोल पंप को छोड़कर कोई भी पंप वाला इस सेंटर को नहीं खोल रहा है। राजस्थान, दिल्ली जैसे राज्यों में 15 साल पुराने वाहनों को डीजल-पेट्रोल नहीं देने का नियम बना है। लेकिन छत्तीसगढ़ में इस तरह की कोई सख्ती नहीं की जा रही है। इस वजह से भी लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते हैं।
<
