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राजधानी के व्यावसायिक इलाका मालवीय रोड, गोलबाजार और बैजनाथपारा में नगर निगम की कार्रवाई के बाद दूसरे दिन फिर अवैध कब्जे हो गए। सड़कें पहले की तुलना में कम लेकिन तीसरे दिन भी अवैध कब्जों से पटीं नजर आई। नगर निगम की टीम प्रहरी ने गुरुवार को भी बड़ा अभ
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मालवीय रोड, गोलबाजार और बैजनाथपारा में त्योहारी सीजन में काफी रश रहता है। शहर की बड़ी आबादी खरीदारी के लिए आज भी गोलबाजार पहुंचती है। मध्यमवर्गीय लोगों की जरूरत का लगभग सभी सामान यहां उनके बजट में मिल जाता है। आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं। इस वजह से आमतौर पर 30 से 40 हजार फुटफॉल बढ़कर एक लाख से ऊपर पहुंच जाती है। पैदल चलने वालों के अलावा इन्हीं सड़कों पर दुपहिया और छोटी गाड़ियां भी चलती हैं।
दुकान घेरकर कारोबार करने वालों के कारण सड़क लगभग आधी हो जाती है। इसलिए जाम के हालात बनते हैं। नगर निगम की टीम मंगलवार से बाजार में कार्रवाई कर रही है। बुधवार को भी बड़ी कार्रवाई की गई। दैनिक भास्कर ने भी यहां अवैध कब्जों को लेकर खबर प्रकाशित की। इसके बाद गुरुवार को सड़कों पहले की तुलना में काफी चौड़ी नजर आई। मालवीय रोड में कारोबारियों ने सफेद पट्टी के पीछे सामान रखे। डिस्प्ले भी सड़क पर नहीं निकाले। कुछ कारोबारियों ने हिमाकत दिखाने की कोशिश की तो नगर निगम की टीम ने गुरुवार को फिर कार्रवाई चलाई।
दुकानवाले ही लगवाते हैं गुमटियां
सड़कों पर लगे ठेले-खोमचे और पसरा लगाकर कारोबार करना राजधानी की आज सबसे बड़ी दिक्कत बन गई है। सड़कों पर दुकानों के सामने फेरी लगाने की शुरुआत करीब 2-3 दशक पहले हुई। दुकानों के सामने फेरी लगाने के एवज में 20 से 50 रुपए रोज का अवैध शुल्क तय हुआ। इस तरह राजधानी में सड़क बेचने का अवैध धंधा शुरू हुआ।
कुछ फेरी वाले और दुकानदारों से शुरू हुए धंधे का यह नया मॉडल बाकी लोगों को भी जंचा। नतीजा हर दुकान के सामने एक फेरी वाला खड़ा हो गया। शुल्क भी 50 से 100, 100 से 200 और 200 से 500 तक पहुंच गया। अब कुछ दुकानदार अपनी दुकान के सामने फेरी लगाने वालों से दिन का हजार रुपए तक वसूलने लगे। मालवीय रोड और गोलबाजार में फुटफॉल इतनी ज्यादा है कि छोटे से छोटा फेरी वाला भी दिनभर में चार-पांच हजार का गल्ला उठा लेता है।
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