![]()
छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर समेत छह जिलों में बिजली के नौ सब-स्टेशन शुरू किए गए हैं। 480 करोड़ रुपए खर्च कर यहां स्मार्ट ग्रिड तकनीक आैर हाईवोल्टेज ट्रांसफार्मर लगाए गए हैं। इससे आसपास के इलाकों में लोगों को बिजली कटौती से निजात मिलेगा। इससे
.
बताया गया है कि नए सबस्टेशनों के साथ राज्य में बिजली आपूर्ति और ट्रांसमिशन क्षमता में काफी सुधार होगा। विभागीय अफसरों का कहना है कि यह परियोजना न सिर्फ शहरों बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी बिजली की गुणवत्ता और उपलब्धता बढ़ाने में मदद करेगी। नए सबस्टेशन आधुनिक तकनीक से लैस हैं। इसमें हाई वोल्टेज ट्रांसफॉर्मर और स्मार्ट ग्रिड तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे न सिर्फ बिजली वितरण में दक्षता बढ़ेगी, बल्कि बिजली की बर्बादी भी कम होगी। इसके अतिरिक्त, राज्य में बिजली की पहुंच और गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए कई जिलों में नए आरडीएसएस काम के साथ-साथ कांकेर और बलौदाबाजार-भाटापारा में प्रमुख सुविधाओं सहित 1,415 करोड़ रुपये से अधिक के नए सबस्टेशन और ट्रांसमिशन भी बनाए जाएंगे।
अबूझमाड़ के जंगलों से महाराष्ट्र तक निकल रही है एनएच 130 डी
छत्तीसगढ़ के लिए एनएच-130 डी सड़क महत्वपूर्ण सड़क साबित होने जा रही है। यह अबूझमाड़ के जंगलों को चीरते हुए महाराष्ट्र के लिए निकलेगी। यह सड़क कोंडागांव से शुरू होकर अलापल्ली (महाराष्ट्र) तक जाती है। इसकी कुल लंबाई लगभग 195 किलोमीटर है। वर्तमान में इस सड़क का काम जारी है। इसके लिए कुतुल से नीलांगुर महाराष्ट्र सीमा तक 21.5 किमी के लिए लगभग 152 करोड़ का टेंडर मंजूर किया गया है।
यह सड़क नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास एवं सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इस सड़क के बन जाने से बस्तर खासकर नारायणपुर, अबूझमाड़ और महाराष्ट्र के अंदरूनी हिस्सों के बीच सीधी सड़क कड़ी बनेगी, जिससे लोगों‑व्यापार‑सेवाओं तक पहुंच में काफी सुधार होगा। नक्सल प्रभावित तथा दूरदराज़ इलाकों में संपर्क सुविधाओं की कमी एक बड़ी बाधा रही है। इस सड़क से वहां की जनता, स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार तक बेहतर पहुंच पाएगी। इस सड़क को दो‑लेन पाव्ड शोल्डर के रूप में विकसित किया जा रहा है, ताकि सालभर आवाजाही हो सकेगी।
<
