![]()
भास्कर न्यूज | उदयपुर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उदयपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। बीते एक सप्ताह के भीतर अस्पताल में तीन मरीजों की मौत हो चुकी है, इसमें सोमवार को एक ही दिन दो मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो गई। लग
.
इससे अस्पताल प्रबंधन व स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीएचसी उदयपुर में लंबे समय से अव्यवस्था बनी हुई है। यहां प्रतिदिन 50 से अधिक मरीज ओपीडी व आपातकालीन सेवाओं के लिए पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी, इलाज में लापरवाही और संसाधनों के अभाव के चलते मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। हालत यह है कि कई मरीजों को प्राथमिक इलाज के नाम पर केवल बोतल चढ़ाकर छोड़ दिया जाता है, जबकि गंभीर मरीजों को देर से मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर किया जाता है।
8 दिसंबर को बुखार और दस्त से पीड़ित दो मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुमडेवा निवासी 40 वर्षीय बुधराम को शाम साढ़े चार बजे एंबुलेंस से अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों द्वारा इलाज शुरू किया गया, लेकिन मात्र आधे घंटे के भीतर ही उसकी मौत हो गई। बुधराम अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और उसके वृद्ध माता-पिता पूरी तरह उसी पर निर्भर थे। इसी दिन खोदला निवासी 26 वर्षीय मुनेश्वर प्रजापति उर्फ पिंटू को शाम सात बजे निजी वाहन से अस्पताल लाया गया।
परिजनों के अनुसार पहले इलाज किया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद उसकी भी मौत हो गई। पिंटू के तीन छोटे बच्चे हैं और उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है। अब परिवार के सामने आजीविका और पालन-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। परिजनों का आरोप है कि दोनों मामलों में इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई। पिंटू के परिजनों का कहना है कि मजदूरी से लौटते समय उसकी तबीयत बिगड़ी थी, अस्पताल में भर्ती करने के बाद हालत और बिगड़ गई, लेकिन डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई।
वहीं बुधराम के परिजनों ने कहा कि हल्के बुखार और दस्त की शिकायत पर अस्पताल ले जाया गया था, जहां केवल बोतल चढ़ाई गई और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता भी लोगों में नाराजगी बढ़ा रही है। ^सीएमएचओ डॉ. पीएस मार्को ने कहा कि ड्यूटी पर रहे डॉक्टरों द्वारा किए गए इलाज की जांच कराई जाएगी। यह देखा जाएगा कि कौन-कौन सी दवाइयां दी गईं और इलाज में कोई चूक तो नहीं हुई। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल उदयपुर सीएचसी की बदहाल स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग पर सवाल खड़ा कर दिया है। 8 दिसंबर को अस्पताल में मौत के बाद पंचनामा करती पुलिस।
<
