मनेन्द्रगढ़ में आगामी जनगणना 2027 को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में पर्यवेक्षकों और प्रगणकों के लिए तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में जनगणना प्रक्रिया, डेटा संकलन और डिजिटल माध्यमों के
.
मास्टर ट्रेनरों ने बताया कि भारत में जनगणना की शुरुआत 1872 में हुई थी और तब से हर दस साल में यह नियमित रूप से कराई जाती है। जनगणना 2027 स्वतंत्र भारत की आठवीं जनगणना होगी, जिसमें तकनीकी और प्रबंधन स्तर पर कई महत्वपूर्ण बदलाव किए जा रहे हैं।

जनगणना के आंकड़े तय करते हैं विकास योजनाएं और नीतियां
प्रशिक्षण के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश की विकास योजनाओं की नींव है। केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाएं, संसाधनों का वितरण और सामाजिक-आर्थिक नीतियां इन्हीं आंकड़ों पर आधारित होती हैं।
इसके अतिरिक्त, जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही लोकसभा, विधानसभा, नगर निकायों और पंचायतों का परिसीमन (डिलिमिटेशन) किया जाता है। यह प्रक्रिया जनसंख्या के अनुपात में उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।

जनगणना कार्य को सटीक बनाने के लिए प्रशिक्षण पर जोर
प्रशासन का उद्देश्य है कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से पर्यवेक्षक और प्रगणक पूरी तरह प्रशिक्षित होकर जनगणना कार्य को सटीक और प्रभावी ढंग से पूरा करें। इससे भविष्य की योजनाओं के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकेंगे।
जनगणना 2027 में आम जनता को स्व-गणना (Self-Enumeration) की सुविधा भी मिलेगी। मास्टर ट्रेनर अमोल झा ने बताया कि भारत सरकार ने इसके लिए एक विशेष पोर्टल (se.census.gov.in) शुरू किया है।
इस पोर्टल के माध्यम से नागरिक 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 (कुछ क्षेत्रों में 1-30 मई) तक अपनी और अपने परिवार की 35 प्रकार की जानकारी खुद ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह डिजिटल प्रक्रिया समय की बचत और सटीक डेटा सुनिश्चित करने में सहायक होगी।
<
