मैकल पर्वत श्रेणी अपनी समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ हवा के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन अवैध खनन के कारण गंभीर खतरे में है। पवित्र नर्मदा नदी का उद्गम स्थल अमरकंटक भी इसी श्रेणी में स्थित है।
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छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित करंगरा घाटी और लालपुर के पहाड़ों में सैकड़ों अवैध क्रेशर संचालित हो रहे हैं। ये क्रेशर बड़ी मशीनों का उपयोग कर पहाड़ों को तोड़ रहे हैं और पत्थरों को क्रश कर बाजारों में बेच रहे हैं, जिससे नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार, यह खनन कार्य एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) और एसईआईएए (राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण) के नियमों का उल्लंघन कर रहा है। खनन स्थलों पर न तो सुरक्षा के कोई इंतजाम हैं और न ही वृक्षारोपण किया गया है। खुदाई निर्धारित गहराई से कहीं अधिक की गई है।

छत्तीसगढ़ की सीमा में भी अवैध खुदाई
चौंकाने वाली बात यह है कि मध्यप्रदेश की लीज पर छत्तीसगढ़ की सीमा में भी अवैध खुदाई की जा रही है, जिससे दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित मैकल पर्वत को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इन क्रेशरों से निकलने वाली तेज आवाजें, उड़ने वाली धूल और दिन-रात दौड़ते भारी वाहन न केवल वन्यजीवों के लिए, बल्कि इंदिरा गांधी ट्राइबल यूनिवर्सिटी की सड़क से गुजरने वाले लोगों के लिए भी बड़ा खतरा बन गए हैं।

क्रेशरों को बंद करने के दिए थे निर्देश
ऐसा नहीं है कि अधिकारियों को इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी। पूर्व में छत्तीसगढ़ वन विभाग की ओर से इन क्रेशरों को बंद करने के निर्देश भी जारी किए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अवैध कारोबार जारी रहा। शिकायत के बाद छत्तीसगढ़ के गौरेला रेंज और मध्यप्रदेश के अनूपपुर रेंज की एक संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की।

शिकायतकर्ता और रेंजर के बयान दर्ज
जांच में खुलासा हुआ कि लीज में ही गड़बड़ी थी और मध्यप्रदेश की लीज होने के बावजूद क्रेशर मालिकों ने छत्तीसगढ़ की सीमा को भी बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है। यह अवैध व्यापार मैकल पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता को पूरी तरह से नष्ट कर रहा है। इस मामले पर शिकायतकर्ता शरद दुबे और गौरेला (छत्तीसगढ़) के रेंजर पीके दुबे के बयान भी दर्ज किए गए हैं।

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