छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को राहत नहीं मिली है।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत ने सोमवार 27 अक्टूबर को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अब चैतन्य बघेल को रायपुर केंद्रीय जेल में ही रहना होगा।
चैतन्य बघेल की ओर से यह उनकी पहली जमानत याचिका थी। इससे पहले उन्होंने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी, लेकिन किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिल सकी।
17 अक्टूबर को हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी को वैध बताया था, जिसके बाद यह याचिका विशेष अदालत में दायर की गई थी। चैतन्य बघेल मनी लॉन्ड्रिंग केस में 18 जुलाई 2025 से जेल में हैं।

24 अक्टूबर को कोर्ट ने सुरक्षित रखा था फैसला
24 अक्टूबर को हुई सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है। अदालत ने कहा कि चैतन्य बघेल की रिहाई से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
ED ने कोर्ट में दावा किया कि चैतन्य इस शराब घोटाले के मुख्य सिंडिकेट का हिस्सा हैं और जांच में उनके खिलाफ कई महत्वपूर्ण सबूत मिले हैं। एजेंसी ने यह भी बताया कि चैतन्य ने 16.70 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर मनी लॉन्ड्रिंग की। इसके लिए नकद भुगतान, फर्जी बैंक एंट्री और फ्लैट खरीदी के बहाने पैसे को सफेद किया गया।

चैतन्य पर कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध
चैतन्य के वकीलों ने अदालत में इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि 18 जुलाई को ईडी ने उनके भिलाई स्थित घर से जन्मदिन के दिन उन्हें गिरफ्तार किया था। ईडी के अनुसार, कुल घोटाले में करीब 1,000 करोड़ रुपये को विभिन्न चैनलों के जरिए सफेद किया गया है।

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