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बगीचा नगर में चल रहे 108 कुंडीय यज्ञीय अनुष्ठान का दूसरा दिन पूर्णतः आध्यात्मिक माहौल में संपन्न हुआ। प्रातःकाल देव आवाहन, देव स्थापना, आचार्यवरण, सर्वतोभद्र, तत्ववेदिका और ऋषि पूजन के साथ यज्ञ भगवान को गायत्री मंत्र की आहुतियां समर्पित की गईं।
शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे प्रज्ञा पुरोहित आचार्य दिनेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को यज्ञ की महिमा और गायत्री मंत्र के महत्व का विस्तृत वर्णन करते हुए बताया कि देवशक्तियाँ सृजनकारी होती हैं। उन्होंने कहा कि परमात्मा की शक्ति सदैव सृजन और संरक्षण के लिए होती है, जो मनुष्य को नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षित रखती है। आत्मशोधन के माध्यम से व्यक्ति अपने दुर्गुणों से मुक्ति पाकर धर्म और कर्म के पथ पर आगे बढ़ सकता है।
सायंकालीन सत्र में आयोजित सत्संग में आचार्य दिनेश ने पावन प्रज्ञा पुराण की कथा सुनाई, जिसका नगरवासियों और गायत्री परिवार से जुड़े लोगों ने लाभ लिया। कथा के दौरान आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति रस से परिसर गूँजता रहा। गायत्री महायज्ञ स्थल पर माता भगवती भोजनालय में भंडारे की सतत व्यवस्था की गई है, जहाँ श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।
वहीं भारतीय संस्कृति और सप्त आंदोलनों की झलक प्रस्तुत करती आकर्षक प्रदर्शनी भी दर्शकों को अपनी ओर खींच रही है। शांतिकुंज हरिद्वार से आए प्रज्ञा पुरोहित दिनेश पटेल, भूषण साहू, छविलाल, हेमलाल और गणेश का यज्ञ समिति द्वारा विशेष स्वागत किया गया। नगर की मातृशक्तियों ने उनके सम्मान में पूजन, वंदन और आरती की। आयोजकों के अनुसार यह पूर्ण अनुष्ठान तीन दिनों तक चलेगा और 12 दिसंबर को दीप महायज्ञ के साथ इसका समापन होगा।
12 को दीपमहायज्ञ में पधारेंगे डॉ. चिन्मय पंड्या आयोजकों ने बताया कि अनुष्ठान के तीसरे दिन, 12 दिसंबर की शाम को भव्य दीप महायज्ञ का आयोजन किया गया है। हाईस्कूल ग्राउंड स्थित यज्ञशाला को 11,000 दीपकों से प्रकाशमान किया जाएगा। इस विशेष अनुष्ठान में देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या का बगीचा नगर आगमन प्रस्तावित है।
वे दीप महायज्ञ में आशीर्वचन प्रदान करेंगे और युवाओं को नई दिशा देने के साथ सत्प्रेरणा भी देंगे। नगर में इस आगमन को लेकर उत्साह का वातावरण बना हुआ है। अनुष्ठान के प्रथम दिवस बगीचा नगर में भव्य कलश यात्रा निकालकर गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ किया गया था। पूरे नगर को पीले ध्वजों और पुष्प सज्जा से सजाकर विचार क्रांति अभियान का संदेश दिया । गायत्री प्रज्ञा पीठ बगीचा, शिव मंदिर रौनी रोड और झांपीदरहा दुर्गामंदिर से निकली कलश यात्राओं ने ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
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