सरगुजा जिले में सुअरों में जापानी इंसेफेलाटिस जापानी बुखार की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन जानवरों के संपर्क में आने वाले लोगों के ब्लड सैंपल लिए है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सकालो सूअर फॉर्म में काम करने वाले कर्मचारियों के साथ ही आस-पा
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सरगुजा जिले के अंबिकापुर, लुंड्रा, बतौली, सीतापुर व मैनपाट क्षेत्र में पशु चिकित्सा विभाग द्वारा जापानी इंसेफेलाटिस फैलने की आशंका पर 120 सुअरों के सैंपल एकत्र किए थे। सैम्पल को जांच के लिए आईसीएआर बेंगलुरु भेजा गया था। जांच में कुल 61 सैंपल में जापानी इंसेफेलाटिस वायरस की पुष्टि हुई है। जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पशु चिकित्सा विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट भेजा।

एकत्र किए गए लोगों के ब्लड सैंपल
मच्छरों के काटने से फैलता है वायरस जापानी इंसेफेलाटिस की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड़ में है। यह वायरल मच्छर के काटने से फैलता है। सुअरों पर इस वायरस के कारण ज्यादा असर नहीं होता है, लेकिन मच्छर यदि सुअरों को काटने के बाद इंसानों को काट ले तो जापानी इंसेफेलाटिस वायरस इंसानों के शरीर में पहुंच जाता है। JEV बीमारी इंसान को हो जाती है लेकिन यह एक इंसान से दूसरे इंसान को नहीं फैलता है।
घातक है जापानी इंसेफेलाटिस जापानी इंसेफेलाटिस मच्छर से फैलने वाला वायरस जनित रोग है जो जापानी इंसेफेलाटिस वायरस से होता है। यह सीधे तौर पर इंसान के मस्तिष्क को प्रभावित करता है और मस्तिष्क में सूजन पैदा करता है। इसका सीधे तौर पर कोई इलाज नहीं है। टीकाकरण से रोकथाम की जा सकती है। वायरस से पीड़ित व्यक्ति का कोविड की तरह लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है।
जापानी इंसेफेलाटिस के अधिकांश संक्रमण बिना लक्षण के होते हैं, लेकिन कुछ में गंभीर रोग विकसित होता है जिसके प्रारंभिक लक्षण बुखार, सिर दर्द, उल्टी, थकान, सुस्ती है। इसके साथ ही संक्रमण बढ़ने पर तेज बुखार के साथ ही मानसिक भ्रम की स्थिति पैदा होती है। गर्दन में अकड़न होती है, बच्चों को दौरे पड़ते है और बेहोशी, कोमा के साथ ही न्यूरोलॉजिकल समस्या जैसे लकवा, बोलने में समस्या होती है। इसे जापानी बुखार कहा जाता है।
रायपुर में होगी सैंपलों की जांच जापानी इंसेफेलाटिस की जांच सुविधा फिलहाल सरगुजा में नहीं है। CMHO डा. पीएस मार्को ने बताया कि सैंपल को जांच के लिए रायपुर ही भेजा जा सकता है। जापानी इंसेफेलाटिस को लेकर सकालो सूअर फ़ार्म क्षेत्र से 23 लोगों के सैंपल लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
डॉ. मार्काे ने बताया कि सरगुजा में जांच के लिए रीजेंट नहीं है। इस कारण जांच रायपुर में की जा रही है। जरूरत पड़ी तो सरगुजा में जांच के लिए रीजेंट मंगाया जा सकता है।
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