छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में बंगाल की खाड़ी से उठे मोन्था तूफान का असर दिख रहा है। पिछले कुछ दिनों से आसमान में घने बादल छाए हुए थे, जिसके बाद 30 अक्टूबर की सुबह से ही अलग-अलग इलाकों में बेमौसम बारिश हुई।
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इस बारिश से किसानों की धान की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते वे मुआवजे की मांग कर रहे हैं। बेमौसम बारिश और तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर खड़ी धान की फसलें गिर गई हैं, वहीं कटाई के बाद खेतों में रखी धान की करपा भीग गई है।
इससे अन्नदाताओं को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। किसानों ने अधिकारियों से नुकसान का आकलन (समीक्षा) करवाकर उचित मुआवजा दिलाने की अपील की हैं।

कांकेर में किसानों की फसलें प्रभावित।
पूरी फसल गिरकर हुई खराब
सिविल लाइन क्षेत्र के किसान प्रभुलाल साहू ने अपनी चार एकड़ उपजाऊ भूमि पर धान की फसल बोई थी। उनकी फसल तैयार होकर खड़ी थी और धान की बालियां बड़ी व सुंदर दिख रही थीं।
कटाई से ठीक पहले आसमान में काले बादल छा गए और बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से उनकी पूरी फसल गिरकर खराब हो गई है।
प्रभुलाल साहू का कहना है कि वे हर साल प्रति एकड़ लगभग 40 हजार रुपए का मुनाफा कमाते थे, लेकिन इस बार उन्हें भारी नुकसान हुआ है। धान से होने वाले मुनाफे को देखते हुए उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर खाद का छिड़काव करवाया था। अब उन्हें कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
किसान प्रभुलाल ने बताया कि उनका खेत एसडीएम साहब के बंगले से सटा हुआ है, जहां से यह सारा नजारा स्पष्ट दिखता है। उन्होंने ग्रामीण स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों से भी मुआवजे के लिए समीक्षा करवाने की मांग की थी, लेकिन अब तक कोई भी कर्मचारी समीक्षा के लिए उनके खेत तक नहीं पहुंचा है।

खड़ी हुई धान की फसल खराब।
शहर से गांव तक किसानों के चेहरे पर उदासी
शहर से लेकर गांव तक हर तरफ बेमौसम बारिश की वजह से किसानों के चेहरे पर उदासी है, इस पर सरजू शोरी का साफ कहना है कि धान बोवाई के बाद समय पर खाद उपलब्ध नही हो पा रहा था, जगह -जगह प्रदर्शन चक्काजाम के बाद कुछ किसानों को खाद मिला तो कई किसान दुकानदारों के पास अधिक कीमत पर खाद की खरीदी करने पर मजबूर थे।
जैसे -तैसे फसल तैयार हुआ और मोन्था तूफान के आने से सब चौपट होने लगा है। शासन प्रशासन को मुआवजे पर ध्यान देना चाहिए पर यहां तो प्रशासन हाथ में हाथ धरे बैठी हुई है, ऐसे में किसान परेशान नही होगा तो क्या होगा।
नुकसान के साथ क्वांटिटी घटने का खतरा
कृषि वैज्ञानिक बीरबल साहू ने बताया कि बेमौसम बारिश की वजह से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, नुकसान से बचने के लिए तैयार हुए फसलों को मशीनों के माध्यम से कटवाया जाए तो कुछ हद तक नुकसान से बचा जा सकता है।
क्योंकि मशीनों में भी धान के गीला होने से पैरा के साथ बालियों के गिरने का खतरा है तो धूप के इंतजार में रूकने से उपजाऊ घटने का डर है, मजदूरों से बिल्कुल कटाई ना करवाए।
मजदूरों से कटाई करवाने पर अधिक नुकसान हो सकता है, इसलिए जिनका फसल तैयार हो चुका है, वह गिरने से बचाने के लिए मशीन से कटाई करवाए व जिनका फसल रुक सकता है वह इंतजार करे।
कांकेर में भारी बारिश की संभावना
मौसम वैज्ञानिकों से चर्चा करने पर उनका कहना है कि मोन्था तूफान का सबसे ज्यादा असर आंध्रप्रदेश, उड़ीसा और छत्तीसगढ़ में रहेगा। तूफान की रफ्तार काफी तेज होने की वजह से छत्तीसगढ़ के ज्यादा हिस्सों पर प्रभाव पड़ेगा, जिसमें कांकेर भी शामिल है।
कांकेर में भारी बारिश की संभावना जताते हुए यलो अलर्ट घोषित किया गया है और यहां रोजाना बूंदाबांदी के साथ घने बादल छाए हुए है, इससे खतरा बरकरार है।
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