रायपुर13 मिनट पहले
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भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजा घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अभनपुर के जमीन कारोबारी जय प्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया है।
ईडी ने आरोपी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत 3 जून को गिरफ्तार किया। मामले में करोड़ों रुपए के मुआवजा घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी है।

कारोबारी जय प्रकाश गांधी को ईडी ने रिमांड पर लिया है।
ईडी की जांच छत्तीसगढ़ एसीबी/ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। यह मामला भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्टनम आर्थिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित भूमि के मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं और धोखाधड़ी से जुड़ा है।

जयप्रकाश गांधी के भाईयों ने ईडी अफसरों से धक्का-मुक्की भी की थी।
अफसरों के साथ मिलकर रची साजिश
जांच एजेंसी के अनुसार जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ अफसरों के साथ मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। आरोप है कि हाईवे एलाइनमेंट में आने वाली भूमि को खरीदने के बाद उसे 500 वर्गमीटर से कम के छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित किया गया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि एनएचएआई से अधिक दर पर मुआवजा प्राप्त किया जा सके।
ईडी के मुताबिक इस कथित फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी और उसके परिवार ने करीब 9 करोड़ 83 लाख रुपए का मुआवजा हासिल किया, जबकि नियमों के अनुसार उन्हें केवल 56 लाख 76 हजार रुपए ही मिलने थे। जांच में सामने आया है कि इस तरह लगभग 9 करोड़ 27 लाख रुपए की अवैध आय अर्जित की गई।

ईडी रेड के दौरान पुलिस भी मुस्तैद रही थी।
शेयर बाजार-म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट किए पैसे
जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले से प्राप्त रकम को छिपाने के लिए उसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया गया। इसे मनी लॉन्ड्रिंग की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
इससे पहले 28 अप्रैल 2026 को ईडी ने रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत जब्त किए गए थे।
गिरफ्तार आरोपी को विशेष पीएमएलए न्यायालय रायपुर में पेश किया गया, जहां से ईडी को तीन दिन की रिमांड मिली है। एजेंसी अब इस मामले में अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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