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600 साल पुराने बस्तर दशहरा में बुधवार से फूल रथ परिक्रमा शुरू होनी थी। शाम करीब 6 बजे भ्रमण पर निकलने वाले इस रथ का पहिया देर रात साढ़े 10 बजे तक अपनी जगह से एक इंच भी आगे नहीं बढ़ पाया। बस्तर दशहरा के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। पूर्व बस्तर राजपरिव
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हालांकि, देर रात भंजदेव की समझाइश पर ही लोगों ने बिना उनके सवार हुए रथ को आगे बढ़ने दिया। रथ खींचने वालों ने पूर्व बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव को रथ पर नहीं बिठाने पर आने वाले दिनों में रथ नहीं खींचने का अल्टीमेटम दे दिया है।
इन हालातों में प्रशासन पूरी तरह बेबस है। दरअसल, शाम को ही पटेल समाज के लोगों ने प्रशासन से कमलचंद्र को रथ पर सवार करने की मांग की थी। इससे पहले कमलचंद्र के रथ पर सवार होने को लेकर लंबे समय तक विवाद चल रहा था। एक पक्ष जहां पूर्व बस्तर महाराजा प्रवीरचंद्र भंजदेव के रथ पर सवार होने का हवाला देते हुए कमलचंद्र को भी रथारूढ़ करने की मांग प्रशासन से कर रहा है, वहीं दूसरे पक्ष ने इसका विरोध करते हुए बीते 60 साल से जारी माई दंतेश्वरी के छत्र को रथारूढ़ रखने की परंपरा कायम रखने की मांग की। इन सबके बीच असमंजस बना रहा कि कमलचंद्र रथ पर सवार होंगे या नहीं।
कलेक्टर-एसपी के मान-मनौव्वल पर भी नहीं मानें रथ खींचने वाले कमलचंद्र भंजदेव और उनकी पत्नी को रथ पर सवार करने की मांग पर अड़े लोगों ने कमलचंद्र की समझाइश के बाद ही रात 10.41 बजे रथ खींचा। इस तरह रथ परिक्रमा शुरू हो पाई। इससे पहले कलेक्टर-एसपी समेत अन्य अधिकारियों ने भी रथ खींचने वालों को काफी मनाने और समझाने की कोशिश की। हालांकि, तमाम प्रयास विफल रहे। कमलचंद्र ने जब रथ खींचने वालों से कहा कि फूल रथ पर माई दंतेश्वरी का छत्र आरूढ़ है। माईजी का अपमान न करें। तब जाकर लोग रथ खींचने को राजी हुए।
परिक्रमा शुरू होने के बाद भी विवाद रथ खींचने वालों ने बुधवार शाम ही साफ ऐलान कर दिया था कि कमलचंद्र के रथ पर सवार हुए बिना वे रथ नहीं खींचेंगे। यह विवाद देर रात रथ की परिक्रमा शुरू होने के बाद भी जारी रहा। इस बीच एक पक्ष जहां बस्तर महाराजा के रूप में कमलचंद्र को रथ पर सवार करने की मांग करता रहा, वहीं दूसरा पक्ष इसका विरोध करता रहा। इस बीच अलग-अलग पक्षों से लोग मान-मनौव्वल और समझाइश के लिए भी आते रहे। 600 साल की रथ परिक्रमा में पहली बार उपजे इस विवाद को खत्म करने की कोशिशें अभी भी सफल होती नहीं दिख रहीं हैं।
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