पुश्तैनी जमीन बचाने की कोशिश में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच पथराव हो गया।
सरगुजा के परसोढ़ी में पुश्तैनी जमीन बचाने की कोशिश में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच पथराव हो गया। जिसमें एएसपी, थानेदार सहित 25 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और ग्रामीणों को मौके से खदेड़ा। मामला लखनपुर थान
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दरअसल, ग्रामीण जमीन अधिग्रहण विरोध कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया। गुलेल से भी हमला किया। हमले में पुलिसकर्मियों के अलावा 12 से ज्यादा ग्रामीणों को भी चोट आई हैं। वहीं, इस मामले में पुलिस ने ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही कई लोगों को हिरासत में लिया गया है।
टीएस सिंहदेव ने एक्स पर लिखा- सरकार जिनकी प्रतिनिधि है, उन्हीं पर लाठियां बरसा रही है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम परसोडीकला का दृश्य लोकतंत्र को शर्मिंदा करने वाला है। जहां गुजरात की एक निजी कंपनी से सरकारी खदान में उत्खनन कराया जा रहा है और विरोध कर रहे स्थानीय ग्रामीणों पर पुलिस का लाठीचार्ज और आंसू गैस बरसाई गई।

उन्होंने लिखा- यही है वह ‘गुजरात मॉडल’, जिसे देश वाराणसी और अयोध्या में भी देख रहा है। जहां स्थानीय लोगों के रोजगार और संसाधनों पर बाहर की कंपनियों और लोगों का कब्ज़ा कराया जा रहा है, और स्थानीय समुदायों के अधिकारों की पूरी तरह अनदेखी कर दी गई है। सरकार का काम जनता की रक्षा करना है, उन्हीं पर लाठियां चलाना नहीं। छत्तीसगढ़ के लोगों के हक, जमीन और भविष्य का इस तरह दमन नहीं किया जा सकता।
पुलिस और ग्रामीण के बीच झड़प की तस्वीरें…

अमेरा गांव के ग्रामीण खदान विस्तार का विरोध कर रहे हैं।

प्रशासनिक अधिकारी करीब 500 की संख्या में पुलिस बल के साथ पहुंचे थे।

कोल माइंस में ग्रामीणों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प।
कांग्रेस ने कहा- यह सरकार की सोच का आइना
कांग्रेस ने भी एक्स पर लिखा- सरगुजा जिले के अमेरा में जो कुछ हो रहा है, वह सिर्फ एक खदान का विवाद नहीं है। यह सरकार की सोच का आइना है। आदिवासी अपनी जमीन, जंगल और भविष्य बचाने के लिए खड़े हैं, लेकिन भाजपा सरकार ने उनकी बात सुनने के बजाय हर हाल में खदान विस्तार को आगे बढ़ाने का रुख अपना लिया है।

खदान विस्तार का विरोध, झड़प के बाद पसरा सन्नाटा
दरअसल, अमेरा खदान के विस्तार के लिए परसोढ़ी कला में साल 2001 में SECL ने जमीन अधिग्रहित की थी, उसे ग्रामीण आज भी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। गांव के केवल 19% किसानों ने ही मुआवजा लिया है। वह भी बिना नौकरी पाए। बाकी ग्रामीण अपनी पुश्तैनी जमीन को कोयला उत्खनन के लिए जबरन लिए जाने का सालों से विरोध कर रहे हैं।
बुधवार को प्रशासन करीब 500 पुलिसकर्मियों के साथ खदान का काम शुरू कराने पहुंचा। ग्रामीणों की ओर से पथराव होने पर पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में पत्थर चलाए, जिसमें 12 से अधिक ग्रामीण घायल हो गए। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर लोगों को तितर-बितर किया और कई ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया।
पुलिस की कार्रवाई के बाद गांव में सन्नाटा पसर गया है। गांव के पुरुष घरों से बाहर चले गए हैं। जमीनों की रखवाली के लिए ग्रामीणों ने जो टेंट-तंबू लगाए थे, पुलिस ने उन्हें उखाड़ दिया है। ग्रामीणों को पकड़ने के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है और बाहर से भी अतिरिक्त फोर्स बुला ली गई है।

पुलिस ने तंबू उखाड़कर ग्रामीणों को खदेड़ा
SECL ने जारी की विज्ञप्ति, 10 करोड़ मुआवजा दिया
झड़प के बाद SECL के जनसंपर्क अधिकारी ने विज्ञप्ति जारी कर दावा किया है कि परसोढ़ी कला के ग्रामीणों को 10 करोड़ मुआवजा बांटा गया है और रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। जमीन का अधिग्रहण साल 2001 में कोल बेयरिंग एक्ट के तहत किया गया था।
कुछ असामाजिक तत्व खनन में बाधा डाल रहे हैं। झड़प में एएसपी और अपर कलेक्टर भी आंशिक रूप से घायल हो गए हैं। ग्रामीणों को खदेड़ने के बाद आज आंशिक रूप से काम शुरू कर दिया गया है। SECL की यह खदान निजी कंपनी संचालित कर रही है। परसोढ़ी कला में खदान का संचालन निजी कंपनी LCC कर रही है।
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