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नवा रायपुर स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में छात्राओं का फेक अश्लील वीडियो बनाने वाले बिलासपुर के छात्र को गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। आरोपी ने अपनी कक्षा की 36 छात्राओं की मोबाइल से फो
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प्रारंभिक जांच में पुलिस का दावा है कि आरोपी ने ये वीडियो किसी के साथ शेयर नहीं किया है। अब तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे वीडियो शेयर किए जाने की पुष्टि हो। आरोपी के पास से 36 वीडियो और फोटो मिले हैं, जिन्हें जब्त कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि बिलासपुर निवासी सैयद रहीम अदनान अली (21) ट्रिपलआईटी में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) विभाग के पांचवें सेमेस्टर का छात्र है। वह इंस्टीट्यूट के हॉस्टल में रहता है। आरोपी ने अपने बैच के 32 से अधिक छात्राओं के मोबाइल से फोटो लिए और कुछ फोटो सोशल मीडिया से डाउनलोड किए।
इसके बाद उसने एआई और एप की मदद से फेक अश्लील वीडियो बनाए। आरोपी नियमित रूप से इन वीडियो को देखता था और अन्य छात्राओं के वीडियो भी बनाने की योजना बना रहा था। उसने एक के बाद एक फेक वीडियो बनाए और धीरे-धीरे 32 छात्राओं के वीडियो तैयार कर लिए। पुलिस ने आरोपी का मोबाइल और लैपटॉप साइबर लैब जांच के लिए भेजा है। ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने वीडियो किसी के साथ साझा किए या नहीं।
आरोपी पर आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज
पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपने कुछ दोस्तों को ये वीडियो दिखाया। इसी दौरान मामला खुल गया और छात्राओं को जानकारी मिली। उन्होंने कॉलेज प्रबंधन से शिकायत की। प्रबंधन ने जांच कराई और फिर पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर उसे बिलासपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी को कॉलेज प्रबंधन ने निलंबित कर दिया है और उसे संस्थान से निष्कासित करने की प्रक्रिया चल रही है।
जागरुकता अभियान के साथ ट्रेनिंग भी जरूरी ^यूजीसी ने भी कॉलेजों को निर्देश दिया है कि छात्र-छात्राओं को साइबर क्राइम और यौन उत्पीड़न से जुड़ी जानकारी दी जाए। संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाए जाएं और प्रशिक्षण दिया जाए। सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल को लॉक करके रखें। -मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम एक्सपर्ट
भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. मनोज साहू, मनोचिकित्सक
मोबाइल-गलत संगत से ऐसी विकृतियां आती हैं ट्रिपलआईटी में जो घटना सामने आई है, इसमें छात्र का व्यवहार मानसिक और व्यवहारिक विकृति है। इसे मेडिकल की भाषा में वॉय्यूरिस्टिक पैराफिलिक बिहेवियर कहते हैं। उन्हें ऐसा करने में मानसिक संतुष्टि मिलती है। सोशल मीडिया, मोबाइल या गलत संगत की वजह से कम उम्र में इस तरह की विकृतियां होती है। अगर किसी को ऐसा हो रहा है तो मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग करनी चाहिए। क्योंकि आगे चलकर यह अपराध में बदल जाता है।
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