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कोयला घोटाले के सहआरोपी को नहीं मिली राहत।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने कहा कि आर्थिक अपराध से देश की अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर प्रभावित होती है। इसे साधारण अपराधों की तरह नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ ही कोयला परिवहन में प्रति टन 25 रुपए टन की उगाही करने के एक आरो
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एसीबी-ईओडब्ल्यू का आरोप है कि प्रदेश में कोयला के परिवहन में जुलाई 2020 से जून 2022 के बीच करीब 540 करोड़ रुपए की रकम अवैध रूप से वसूली गई। इस मामले में आईएएस रानू साहू, राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी, समीर बिश्नोई समेत अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। इस मामले में रायगढ़ निवासी नवनीत तिवारी के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया था। उसे 12 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया गया था। वर्तमान में वह ज्यूडिशियल कस्टडी में है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर लगाई याचिका आरोपी नवनीत तिवारी ने कोयला घोटाले के मुख्य आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से दी गई जमानत को आधार बनाकर हाईकोर्ट में जमानत याचिका लगाई थी। इसमें कहा गया कि कोयला घोटाले में रानू साहू, सौम्या चौरसिया, सूर्यकांत तिवारी, समीर बिश्नोई को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में याचिकाकर्ता को भी जमानत का हकदार मानकर बेल देने का आग्रह किया गया।
आरोप- सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य, 20 करोड़ की उगाही की तिवारी पर आरोप है कि वह सूर्यकांत तिवारी के सिंडिकेट का सक्रिय सदस्य है, जिसने कोयला परिवहन पर 25 रुपए प्रति टन की दर से उगाही की। वह सूर्यकांत तिवारी के लिए उगाही का हिसाब-किताब रखता था और आय-व्यय डायरी में एंट्री करता था। जांच में सह-आरोपी के पास से बरामद डायरी में उसका नाम नीतू कोडवर्ड से दर्ज पाया गया। रायगढ़ जिले से 20 करोड़ रुपए की अवैध वसूली में उसकी भूमिका सामने आई है।
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