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धमतरी जिले में भालू, जंगली सूअर, हिरण के साथ तेंदुए की मौजूदगी है। शीत ऋतु के दौरान तेंदुआ अपने वनक्षेत्र से बाहर निकलकर समीपवर्ती गांवों की बस्तियों की ओर मूवमेंट करता है। सुरक्षा के लिहाज से डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव द्वारा वनक्षेत्रों से लगे गांवों में सतर्कता बढ़ाकर सुरक्षा एवं जागरूकता के व्यापक उपाय किए जा रहे हैं। बीते सालों में तेंदुए के हमले से बच्चे की मौत की घटना सामने आई है। कई ग्रामीण घायल भी हुए है। महीनेभर पहले पथर्रीडीह के पोल्ट्री फार्म में एक तेंदुआ घूस आया था, जिसे स्थानों लोगों ने जैसे-तैसे जंगल की ओर भगाया था।
बीते दिनों नगरी तहसील के वनांचल से लगे कुकरीकोन्हा, मुकुंदपुर, पालगांव, कोरमुड़, केकराखोली, गोरसानाला, गट्टासिल्ली, सिरकट्टा, मुड़केरा, गोविंदपुर, चिंवर्री, कल्लेमेटा सहित अन्य ग्रामों में तेंदुए की गतिविधियों की जानकारी के आधार पर हाई-रिस्क गांव के लिए अलर्ट जारी किया है। वन परिक्षेत्र अधिकारियों, डिप्टी रेंजर्स एवं वनरक्षकों द्वारा गांव-गांव जाकर ग्रामीणों को जरूरी सावधानी की जानकारी दी जा रही है। मुनादी के माध्यम से जागरूकता बढ़ाई जा रही है। ग्राम पंचायतों को सतर्क किया है। डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने कहा कि 16 दिसंबर को जिले के विभिन्न वन परिक्षेत्रों में विशेष रात्रि गश्त अभियान संचालित किया गया। भखारा, कुरूद, नगरी, मगरलोड, बोरई, सिहावा सहित संवेदनशील क्षेत्रों में सघन गश्त कर वाहनों की जांच की गई। अभियान के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध कटाई, शिकार अथवा अन्य वन अपराध की पुष्टि नहीं हुई।
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