रायपुर के होटल कारोबारी दीपक टंडन ने दंतेवाड़ा की DSP कल्पना वर्मा केस में पहली बार पुलिस ने बयान जारी किया है।
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रायपुर एसएसपी लाल उम्मेद सिंह ने मामले में जांच होने की बात दोहराई है। वहीं पुलिस महकमें के मुखिया डीजीपी अरुण देव गौतम से भी इस मामले को लेकर मीडियाकर्मियों ने चर्चा की।

डीजीपी अरुण देव गौतम।
डीजीपी गौतम ने दोहराया कारोबारी और डीएसपी केस की अधिकृत शिकायत उनके पास नहीं पहुंची है। शिकायत आने पर जांच कराई जाएगी।
आपको बता दे, कि रायपुर के होटल कारोबारी दीपक टंडन ने दंतेवाड़ा में पदस्थ डीएसपी कल्पना वर्मा पर रिश्वत, ब्लैकमेलिंग और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। कारोबारी टंडन का दावा है कि, DSP ने पहले उन्हें लव ट्रैप में फंसाया। फिर शादी का झांसा देकर उनसे करोड़ों रुपए, महंगी गाड़ी और कीमती गहने ले लिए।

डीएसपी कल्पना वर्मा ने दैनिक भास्कर को ये मैसेज भेजा है।
कारोबारी के आरोपों पर दैनिक भास्कर की टीम ने DSP कल्पना से बातचीत की थी, तो उन्होंने बताया, कि टंडन ने उनकी सोशल मीडिया से तस्वीरें निकालकर फर्जी चैट्स तैयार किए हैं। इस मामले में उन्होंने लीगल एक्शन लेने की प्रक्रिया में आगे बढ़ जाने की बात कही है। वहीं, आरोपों पर कहा कि, ये सिर्फ इसलिए किया गया है, क्योंकि टंडन हमारे पैसे वापस नहीं लौटा पा रहा था।

कारोबारी दीपक टंडन और डीएसपी कल्पना वर्मा।
अब पढ़े कारोबारी ने कब की थी शिकायत
रायपुर के कारोबारी दीपक टंडन ने अक्टूबर महीने में खम्हारडीह थाना में शिकायत की थी। शिकायत पर टंडन ने आरोप लगाया था, कि डीएसपी और उनके परिजनों पर पैसे, गाड़ी और ज्वैलरी लिए।
अब उनके द्वारा सामान को वापस नहीं किया गया। कारोबारी की शिकायत पर खम्हारडीह पुलिस ने एक्शन नहीं लिया, तो कारोबारी ने मीडिया को पूरे मामले की जानकारी दी। मीडिया में मामला आने के बाद खम्हारडीह पुलिस ने मामले में जांच शुरू की है, लेकिन पूरे मामले में खम्हारडीह पुलिस के जिम्मेदारी अधिकृत जानकारी देने से बच रहे थे।

डीएसपी कल्पना वर्मा ने मामलें में लीगल एक्शन लेने की बात दोहराई है।
अब पढ़े DSP कल्पना वर्मा का बयान
DSP कल्पना वर्मा ने बताया कि, टंडन कोर्ट से केस वापस लेने के लिए लगातार दबाव बना रहा था, जब बात नहीं बनी तो मीडिया में झूठी तस्वीरें और चैट वायरल कर दी।
टंडन के साथ वायरल हुए अपने वीडियो को लेकर उन्होंने कहा कि, वो टंडन से बकाया पैसे लेने के लिए होटल गई थी। टंडन ने उनकी सोशल मीडिया से तस्वीरें निकालकर फर्जी चैट्स तैयार किए हैं। इस मामले में उन्होंने लीगल एक्शन लेने की प्रक्रिया में आगे बढ़ जाने की बात कही है।

अब पढ़े कैसे हुई थी कारोबारी और DSP की दोस्ती
दरअसल, DSP कल्पना वर्मा जब महासमुंद में पदस्थ थी। 2021 में वह अपने कुछ साथियों के साथ टंडन के होटल पहुंची थी। कल्पना का एक बैच मेट और टंडन आपस में म्यूचल फ्रेंड थे। इसी ने टंडन और कल्पना की मुलाकात कराई। दोनों के बीच नंबर एक्सचेंज हुए।
मुलाकात के लगभग 2 दिन बाद कल्पना के नंबर से टंडन को कॉल आया। मिलने-बैठने की बात हुई। इस तरह चीजें आगे बढ़ी। जब भी कल्पना महासमुंद से आती दोनों के बीच मीटिंग होती थी। धीरे-धीरे साथ घूमने-फिरने और शॉर्ट टूर पर भी जाने लगे।

डीएसपी के अनुसार टंडन पर उनके पिता का लगभग 42 लाख से ज्यादा बकाया है। इसकी एवज में उनके पिता को टंडन ने तीन चेक दिए थे।
DSP के परिवार ने चेक बाउंस का केस दर्ज कराया
टंडन ने बताया कि, चेक अमाउंट टंडन की पत्नी के अकाउंट से कटना था। हालांकि डील बाद में हो नहीं पाई। टंडन ने इसके बाद अपने पैसे वापस मांगे, लेकिन दूसरे पक्ष ने चेक होने की बात से इनकार कर दिया। दो दिन बाद चेक बाउंस का मामला उनकी पत्नी के खिलाफ दर्ज करा दिए।
इसके बाद टंडन को समझ आया कि उनके साथ कल्पना और उनके घर वालों ने मिलकर ठगी की है। दीपक टंडन के मुताबिक, इसी दौरान DSP लगातार पैसों की मांग करती रहीं। दीपक ने क्लेम किया है कि उसने DSP को 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का सामान और पैसा दिया।

टंडन के अनुसार DSP कल्पना उन्होंने ये उपहार दिया है-
- 12 लाख की हीरे की अंगूठी
- 5 लाख की सोने की चेन और टॉप्स
- 1 लाख का ब्रेसलेट
- एक इनोवा क्रिस्टा कार
सबूत सौंपने का दावा- वॉट्सऐप चैट और CCTV फुटेज
कारोबारी दीपक ने खम्हारडीह थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए वॉट्सऐप चैट, CCTV फुटेज और अन्य सबूत पुलिस को सौंपे हैं। आरोप है कि जब उन्होंने शिकायत वापस लेने से इनकार किया, तो DSP ने फर्जी मामलों में जेल भेजने की धमकी दी। वर्तमान में कल्पना दंतेवाड़ा में पदस्थ है।
टीआई पर गिरी गाज
कारोबारी–डीएसपी केस में जांच ठीक तरह से नहीं करने पर बीते दिनों थाना प्रभारी का तबादला रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कर दिया है। इस मामले की जांच अब खम्हारडीह थाना के नए प्रभारी परेश पांडेय करेंगे। चर्चा है, कि तत्कालीन थाना प्रभारी ने उक्त मामले वरिष्ठ अधिकारियों को सही जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई, इसके साथ ही उनकी कई शिकायतें भी अफसरों के पास पहुंची थी।
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