बलरामपुर जिले के रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 1 रहने वाले दिव्यांग जगदंबा सिंह (30 साल) बचपन से ही दाहिने पैर से अक्षम हैं। इसके बावजूद वे टेंपो चलाकर माल ढुलाई का कठिन काम कर रहे हैं और अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।
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जगदंबा सिंह की दो बेटियां हैं, जिनकी जिम्मेदारी वे पूरी लगन से निभाते हैं। वे रोजाना टेंपो चलाकर और खुद माल लोड-अनलोड करके लगभग 500 से 600 रुपए कमाते हैं। यह चुनौतीपूर्ण कार्य वे पिछले 6 सालों से कर रहे हैं, जो सामान्य व्यक्तियों के लिए भी कठिन माना जाता है।

टेंपो में खुल सामान लोड करते है।
सेकेंड हैंड टेंपो खरीदकर काम शुरू किया
पहले जगदंबा बढ़ई का काम करते थे। हालांकि, 2019 तक उस पेशे से पर्याप्त आय न होने के कारण उन्होंने एक सेकेंड हैंड टेंपो खरीदा और माल ढुलाई का काम शुरू किया। इस कदम से उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली।
शासन-प्रशासन से सहयोग की अपील
जगदंबा की पत्नी गुलाबी सिंह भी दिव्यांग हैं। दोनों पति-पत्नी ने कभी भी अपनी दिव्यांगता को कमजोरी नहीं बनने दिया। जगदंबा ने बताया कि यदि उनकी पत्नी को कोई छोटा-मोटा काम मिल जाए, तो परिवार की आर्थिक स्थिति और मजबूत हो सकती है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से सहयोग की अपील की है। जगदंबा सिंह जैसे व्यक्ति समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। ऐसे मेहनती और आत्मनिर्भर दिव्यांगों को स्वरोजगार में सहयोग प्रदान करने से वे और अधिक सशक्त हो सकते हैं।
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