सतनामी समाज ने छत्तीसगढ़ की नई विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ रखने की मांग की है। इसको लेकर समाज के युवाओं ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को ज्ञापन सौंपते हुए विधानसभा सत्र में इस विषय को मजबूती से उठाने का आग्रह किया है।
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युवाओं ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव और बिलाईगढ़ विधायक कविता प्राण लहरे को ज्ञापन सौंपा। समाज का कहना है कि, पुराने विधानसभा भवन का नाम ‘मिनी माता विधानसभा भवन’ था, उसी परंपरा को बनाए रखते हुए नए भवन को भी यही नाम दिया जाना चाहिए।
सतनामी समाज का तर्क है कि यह विषय केवल नामकरण का नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक पहचान, इतिहास और सर्व समाज की भावनाओं से जुड़ा है। मिनी माता का नाम समानता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक रहा है। ऐसे में उनके नाम को बनाए रखना जनभावनाओं के अनुरूप होगा।

नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत से प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात।
सामाजिक इतिहास में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा
समाज के युवाओं ने बताया कि मिनी माता अविभाजित मध्यप्रदेश की पहली दलित महिला सांसद थीं और छत्तीसगढ़ के सामाजिक इतिहास में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। उनके योगदान को सम्मान देने के लिए विधानसभा भवन का नाम यथावत रखा जाना चाहिए।
युवाओं ने उम्मीद जताई कि विधानसभा सत्र के दौरान जनप्रतिनिधि इस मांग को सदन में प्रभावी ढंग से उठाएंगे, जिससे छत्तीसगढ़ की सामाजिक और ऐतिहासिक विरासत को सम्मान मिल सके। इस दौरान पुनेश्वर लहरे, अंकित बंजारे, आलोक खरे, मनीष बांधे, ऋतिक बघेल, सौरभ महिलांगे और कुनाल खूंटे सहित समाज के कई युवा मौजूद रहे।
नवंबर में पीएम मोदी ने किया था नए विधानसभा भवन का उद्घाटन
नवा रायपुर में बनी छत्तीसगढ़ की नई विधानसभा भवन एक आधुनिक और इको-फ्रेंडली इमारत है। 324 करोड़ रुपए की लागत से बने इस भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 नवंबर 2025 को किया था। इसी भवन में 14 दिसंबर 2025 से पहला शीतकालीन सत्र शुरू हुआ।
नई विधानसभा को मॉडर्न सुविधाओं से लैस किया गया है। जिसमें पेपरलेस कार्यवाही, सोलर पैनल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और आधुनिक ऑडियो-वीडियो सिस्टम शामिल हैं। इसे लोकतंत्र और जन-आवाज़ का आधुनिक मंदिर माना जा रहा है।

नया विधानसभा भवन
नई विधानसभा भवन की प्रमुख विशेषताएं
- स्थान: नवा रायपुर, सेक्टर-19
- लागत: 324 करोड़ रुपए
- क्षेत्रफल: 51 एकड़
- उद्घाटन: 1 नवंबर 2025
- पहला सत्र: 14 दिसंबर 2025 (शीतकालीन सत्र)
- डिजिटल सुविधा: पूरी तरह पेपरलेस सत्र
- इको-फ्रेंडली: सोलर पैनल, रेन वाटर हार्वेस्टिंग
- संरचना: तीन विंग (A, B, C) – सदन, सचिवालय, सेंट्रल हॉल और मंत्रियों के कार्यालय
- क्षमता: 120 विधायकों के बैठने की व्यवस्था
- अतिरिक्त सुविधाएं: 500 सीटों का ऑडिटोरियम, 200 सीटों का सेंट्रल हॉल, म्यूजियम, बस्तर और सरगुजा कला से सजे कॉरिडोर, एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक अस्पताल।
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